राष्ट्रपति चुनाव को लेकर शिरोमणि अकाली दल (बादल) में बगावत हो गई है। पार्टी विधायक मनप्रीत अयाली ने सोमवार को राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार कर दिया। उनका कहना है, पार्टी की ओर से एनडीए समर्थित राष्ट्रपति प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिए जाने से पहले पार्टी नेतृत्व ने उनसे सलाह ही नहीं ली।
117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के तीन विधायक हैं। अयाली ने वीडियो संदेश में कहा कि वह अपने दम पर चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं। जब पार्टी ने भाजपा उम्मीदवार को वोट देने का फैसला किया तो पार्टी विधायक से सलाह क्यों नहीं ली। सिख समुदाय से भी राय नहीं पूछी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के साथ हमेशा भेदभाव होता रहा है। उन्होंने पंजाब के मुद्दों का जिक्र करते हुए विवादित नदी जल बंटवारे के मुद्दे का समाधान न होने के अलावा पंजाबी भाषीय इलाकों को राज्य को सौंपने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद उससे पंजाब के मुद्दों के समाधान को लेकर काफी उम्मीदें थीं लेकिन मुद्दे अभी अनसुलझे हैं।
भाजपा पर मुखर अयाली
शिअद विधायक अयाली भाजपा पर मुखर दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पंजाब का हक छीन रही है। अभी तक जो भी फैसले केंद्र कर रहा है, उनसे चंडीगढ़ पर पंजाब का हक कमजोर हो रहा है। उन्होंने केंद्र द्वारा हरियाणा को विधानसभा बनाने के लिए चंडीगढ़ में जमीन दिए जाने पर एतराज जताया। साथ ही पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीकरण, बीबीएमबी मुद्दा, बंदी सिखों की रिहाई, चंडीगढ़ में केंद्रीय नियम लागू करने जैसे कई मामलों में पंजाब के साथ पक्षपात हो रहा है।
सिखों की बात करे पार्टी
अयाली ने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह पंजाब में सिर्फ राज करना चाहते हैं, जबकि उन्हें सिखों का हक दिलाने के पीछे भागना चाहिए। शिअद से पंजाब के लोगों को बड़ी उम्मीद हैं। उन्होंने पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन पर कहा कि जो बदलाव होने हैं उन्हें जल्द किया जाना चाहिए, जिससे सूबे में एक बार फिर से पार्टी मजबूत हो सके।
एनडीए राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू को समर्थन देने का निर्णय शिरोमणि अकाली दल ने पूर्ण सहमति से लिया। ऐसे संयुक्त निर्णयों का सम्मान करना सभी पदाधिकारियों का कर्तव्य है। - डॉ. सुखविंदर कुमार सुखी, विधायक, शिअद।