डबवाली में हुआ भीषण अग्निकांड याद है न। उसकी पीड़िता की ये दर्दभरी कहानी पढ़कर आपकी आंखें भी भर आएंगी। डबवाली अग्निकांड की बरसी 23 दिसंबर को है।
19 वर्ष पहले घटित इस अग्निकांड की दहक आज भी किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती है। 28 वर्षीय सुमन कौशल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सुमन इस अग्निकांड में बुरी तरह से जल गई थी।
उस वक्त पीड़ितों को सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया था कि उसे नौकरी दी जाएगी। सुमन पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से तीन बार मिल चुकी हैं। उसने पीड़ितों से किए गए वादे को याद दिलाया, लेकिन हुड्डा ने उसका आवेदन पकड़ने के बाद यही कहा, देखेंगे।
आज भी मंजर याद कर सिहर उठती है सुनीता
सुनीता आज भी उस मंजर को याद कर सिहर उठती हैं। उस दिन वह अपनी सहेली सुनीता के साथ राजीव मैरिज पैलेस में आयोजित डीएवी स्कूल का वार्षिक कार्यक्रम देखने गई थी। खचाखच भरे पैलेस में दोनों को बैठने के लिए महज एक कुर्सी मिली।
अचानक उसे पता चला कि हॉल में आग लग गई है। अभी पांच से सात मिनट हुए थे कि स्टेज से घोषणा होने लगी कि कृपा कर बैठे रहें, आग पर काबू पा लिया जाएगा। पीछे मुड़कर देखा तो आग लपटें तेजी से उनकी ओर बढ़ रही थी। सुनीता भाग खड़ी हुई। सुमन खुद को संभालती, इससे पहले ही आग ने उसे जकड़ लिया।
टूटी दीवार से निकलकर जल रही सुमन पैलेस से बाहर आई। जबकि उसकी सहेली की मौत हो चुकी थी। सौ फीसदी जल चुकीं सुमन की जख्मों पर पिछली सरकारों की वादाखिलाफी आज भी नमक छिड़क रही है। खुद को स्थापित करने के लिए उसे एक नौकरी की दरकार है।
मजाक उड़ाता है हर कोई, नफरत से देखता
सुमन ने बताया कि छठी से दसवीं की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल से करने के बाद आखिरकार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में उसे 11वीं कक्षा में दाखिला मिला। लड़कों के साथ बैठकर 11वीं तथा 12वीं की परीक्षा पास की।
पिता दयानंद कौशल के सड़क दुर्घटना में घायल होने के बावजूद वर्ष 2007 में बीए क्लीयर की। 2008 में बीएड पास की। यहीं नहीं एचटेट की परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक पाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पिछले छह वर्षों से सुमन नौकरी के लिए मारी-मारी फिर रही हैं।
सुमन के अनुसार, अग्निकांड पीड़ितों के आंसू पोंछने के लिए अग्निकांड स्मारक स्थल पर पहुंचे डबवाली के पूर्व विधायक अजय चौटाला के आगे मिन्नतें कर चुकी हैं। उस समय उन्होंने भी पांच अग्निकांड पीड़ितों को सिरसा स्थित संस्थान में नौकरी देने का वादा किया था।
जब वह संस्थान में नौकरी के लिए पहुंची तो उसे नफरत भरी निगाह से देखा गया। उसे औढ़ां स्थित एक शिक्षण संस्थान में भेज दिया गया। संस्थान प्रबंधकों ने उसका मजाक उड़ाया। केवल 3000 रुपये प्रति माह देने की बात कही। जब अजय चौटाला के 12000 रुपये सैलरी देने का वादा की याद दिलाई तो कहा गया कि चौटाला से लिखवाकर लाओ।
दो बार किया एमए करने का प्रयास
सुमन के हौंसले बुलंद हैं। वह एमए करना चाहती है। इसके लिए दो बार फॉर्म भर चुकी हैं, खूब तैयारी भी की, लेकिन परीक्षाएं जून, जुलाई में होने के कारण वह परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाई चूंकि अग्निकांड में मिले घाव गर्मी में तकलीफदायक हो जाते हैं। जिस कारण पूरी गर्मी वह घर की चारदीवारी में ही गुजारती है।
किसी विद्यालय ने नहीं दिया एडमिशन
प्लास्टिक सर्जरी होने के बाद वह पुन: पढ़ने के लिए डबवाली पहुंची सुमन को किसी भी निजी या सरकारी विद्यालय में एडमिशन नहीं मिला। रहम करने की अपेक्षा स्कूल प्रबंधकों ने उसके कुरूप चेहरे का हवाला देते हुए मजाक उड़ाया।
नौकरी मिलने के बाद करूंगी शादी
मैं 100 फीसदी जली हुई हूं। माता-पिता उम्र का ख्याल करते हुए शादी करवाना चाहते हैं। मेरी भी जिद है कि जब तक अपने दम पर नौकरी नहीं लूंगी तब तक शादी नहीं करूंगी। बेशक हमसफर अच्छा मिल जाए, लेकिन वर्तमान समय में खुद के पैरों पर खड़ा होना जरूरी है।
-सुमन कौशल