सीटीयू की ओर से लांग रूट पर चलाई जाने वाली सौ बसों का प्रपोजल अटक गया है। छह महीने से इसकी फाइलें अधिकारियों के टेबल पर घूम रही हैं। लेकिन इसकी मंजूरी नहीं मिली है।
दिसंबर 2015 में पूर्व एडवाइजर विजय देव ने घोषणा की थी कि सीटीयू लॉन्ग रूट पर अपने बेड़े में जल्द सौ बसें शामिल करेगा। इसके बाद सीटीयू ने जनवरी 2016 में यह प्रपोजल प्रशासन को भेजा था। लेकिन छह माह बाद भी लॉन्ग रूट बसों की फाइलें अधिकारियों के टेबल पर घूम रही हैं। इसके लिए अभी तक पॉलिसी फाइनल नहीं हो पाई है।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रपोजल में जानबूझ कर कमियां निकाली जा रही हैं।
चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग ये बसें नहीं खरीदना चाहता है। चंडीगढ़ प्रशासन लॉन्ग रूट में घाटे की बात कहकर विभाग को नई बसें नहीं खरीदने दे रहा है। सीटीयू की पुरानी बसों का समय पूरा हो गया है। इस कारण 40 बसें बंद भी हो गई हैं। अब सीटीयू की लॉन्ग रूट पर केवल 60 बसें ही चल रही हैं। जबकि इससे पहले बेड़े में 100 नई बसें शामिल कर इसकी संख्या 200 तक करने की योजना थी। चंडीगढ़ प्रशासन और एसटीए की क्लीयरेंस न मिलने से सीटीयू बसों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है।
सीटीयू वर्कर्स यूनियन के सलाहकार रंजीत हंस ने बताया कि लांग रूट पर बसें चलाए जाने का प्रपोजल बनाया गया है। 100 नई बसों की खरीद की फाइल तीन महीने से अधिकारियों के टेबल पर घूम रही है। वह मंगलवार को एडवाइजर से मिलेंगे और प्रपोजल पास करने की मांग करेंगे।
अमित तलवार, सीटीयू, निदेशक ने बताया कि सीटीयू की लॉन्ग रूट की बसों का प्रपोजल बनाया गया है। इसके लिए एसटीए, टांसपोर्ट और चंडीगढ़ प्रशासन से मीटिंग चल रही है। सभी ऑब्जेक्शन पर मंजूरी मिलने के बाद कोशिश रहेगी कि जल्द ही बसें सड़कों पर उतारी जाएं।