वारदात से पहले सीन ऑफ क्राइम टीम मौके पर कैसे पहुंच गई, जबकि थाना पुलिस मौके पर बाद में पहुंची। पुलिस ने आरोपी के कबूलनामे से पहले ही वारदात में इस्तेमाल मेज व खाट कैसे बरामद कर ली?
पुलिस द्वारा चार्जशीट में दायर दलीलों पर कोर्ट ने ऐसे ही सवाल उठाते हुए पिछले दिनों हत्या के तीन आरोपियों को बरी कर दिया था। अब कोर्ट की पूरी जजमेंट आने के बाद रायपुररानी थाना पुलिस को फटकार भी लगाई गई है और कोर्ट ने अपनी जजमेंट में पुलिस की जांच को घटिया बताया।
जून 2013 को मिला था शव
पुलिस केस के मुताबिक, रायपुररानी थाना क्षेत्र में छह जून 2013 को सपना नाम की महिला को उसके पति प्रदीप, देवर संदीप व सहयोगी कमल ने गला दबाकर मारा और उसके बाद फंदे से लटकाया, ताकि यह आत्महत्या लगे। हत्या का कारण प्रदीप की मांगों को सपना द्वारा पूरी नहीं करना बताया गया था। पुलिस की चार्जशीट में इतने झोल थे कि संदेह के आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 10 अप्रैल को बरी कर दिया।
आरोपियों को ऐसे मिला लाभ
- पुलिस ने बताया कि छह जून 2013 को रात 8:15 बजे को वारदात की शिकायत मिली और 8:30 बजे रात को पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जांच की। दूसरी ओर सीन ऑफ क्राइम प्रभारी डॉ. रीति सैणी ने ट्रायल के दौरान कोर्ट को बताया कि वह उस दिन शाम पांच बजे ही मौक-ए-वारदात पर पहुंच गई थीं।
- पुलिस ने कोर्ट को बताया कि 11 जून 2013 को आरोपी प्रदीप ने वारदात कबूल की और साथ ही दस्तावेजों 10 जून को हत्या में इस्तेमाल खाट और मेज की बरामदगी कबूलनामे के आधार पर दिखा दी।
कोर्ट का सवाल
- वारदात से पहले सीन ऑफ क्राइम टीम मौके पर कैसे पहुंच गई?
- वारदात में इस्तेमाल खाट व मेज को कबूलनामे से पहले 10 जून को ही कैसे रिकवर कर लिया गया?