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काला सच ये भी...चंडीगढ़ में अपनों से सुरक्षित नहीं महिलाएं

Tue, 08 Mar 2016 10:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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rape - फोटो : Demo
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शहर में महिलाएं अपनों से ही ज्यादा असुरक्षित हैं। शहर में पिछले साल सामने आए रेप के मामलों में यह पाया गया कि 82 फीसदी केसों में आरोपी पीड़िता का दूर का रिश्तेदार या किसी न किसी तरह से जानने वाला ही था। जबकि 11 फीसदी मामलों में पड़ोसी दुष्कर्म का आरोपी निकला, 6 फीसदी दुष्कर्म के मामलों में तो सगे संबंधी ही रेप के आरोप में पकड़े गए।
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पिछले साल शहर में कुल 78 रेप के मामले अलग-अलग थानों में दर्ज हुए। सभी केसों में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया। अधिकतर दुष्कर्म के मामले घरों में ही घटित हुए। छह मामलों में पीड़िता ने शिकायत दी कि उससे जबरदस्ती होटल में हुई। 15 दुष्कर्म के मामले अन्य जगहों पर हुए।

ईव टीजिंग भी बढ़ी
2015 में ईव टीजिंग और शारिरिक छेड़छाड़ के मामले भी बढ़े हैं। 2015 में ईव टीजिंग के कुल 36 मामले पुलिस ने दर्ज किए, जिनमें 31 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। वहीं 2015 में महिलाओं से शारीरिक छेड़छाड़ के कुल 76 मामले थानों में दर्ज हुए, जिनमें से पुलिस ने कुल 71 मामलों को सुलझा लिया।
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वुमन एंड चाइल्ड सपोर्ट यूनिट की डीएसपी अंजिथा चैपियाल ने बताया कि महिलाओं के साथ होने वाले ज्यादातर मामलों मेें उनके जानकार ही शामिल होते हैं। इसलिए महिलाओं को दूसरों से ज्यादा अपनों से बचने की जरूरत होती है। पुलिस कई स्कूल-कॉलेजों में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देती है। हजारों छात्राओं को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि किसी भी महिला को अगर घर या बाहर किसी तरह की भी कोई परेशानी हो तो वो हेल्पलाइन नंबर 1091 पर भी कॉल कर शिकायत दे सकती है। यह हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे काम करता है।
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