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नाबालिग से रेप करने वाले को कोर्ट ने दी चौंका देने वाली सजा

Sat, 19 Sep 2015 07:09 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, चंडीगढ़
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13 वर्षीय किशोरी से रेप करने के दोषी नाबालिग को जुवेनाइल कोर्ट ने जो सजा सुनाई। उसे जानकर हर कोई चौंक गया। दरअसल13 वर्षीय किशोरी से दुराचार के दोषी नाबालिग को जुवेनाइल कोर्ट ने दो साल तक कम्युनिटी सर्विस की सजा सुनाई है।
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इसके तहत दोषी को पीजीआई में आने वाले मरीजों की सेवा करनी होगी। ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट शिफा की कोर्ट के अनुसार दोषी को दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक पीजीआई में सेवाएं देनी होंगी। इस दौरान वह मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की देखरेख में कार्य करेगा। साथ ही सेवा में कोताही बरतने पर उसके खिलाफ सख्ती बरती जा सकती है।

अगस्त 2012 में पीड़िता के पिता की शिकायत पर सेक्टर-11 थाना पुलिस ने खुड्डा लाहौरा की रहने वाली चंचल नामक महिला समेत उसके पड़ोस में रहने वाले नाबालिग को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ पुलिस ने दुष्कर्म, कैद में रखने, धमकाने और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत केस दर्ज कि या था।
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वहीं चंचल पर आरोप था कि उसने नाबालिग के इस जघन्य अपराध को अंजाम देने में उसकी मदद की। हालांकि बाद में जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में उसे बरी कर दिया था।

पुलिस को दी शिकायत के अनुसार जुलाई 2012 में पीड़िता के पड़ोस में रहने वाले महिला चंचल ने नाबालिग को किसी काम के लिए अपने घर पर बुलाया। वहां पीड़िता पहले से मौजूद थी। इसके बाद चंचल ने कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी। दोषी ने पीड़िता से चार बार दुष्कर्म किया। साथ ही इस बारे में किसी को बताने पर उसे जान से मारने की धमकी दी।
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दोषी दोपहर 3 से 6 बजे तक पीजीआई में अपनी सेवाएं देगा

वारदात के बादर चंचल ने बाहर से कुंडी खोल दी। डर के कारण पहले तो पीड़िता ने वारदात की जानकारी किसी को नहीं दी, लेकिन करीब डेढ़ महीने बाद उसकी बार-बार तबीयत खराब रहने पर मां को इसके बारे में बता दिया।

इसके बाद परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल करवाने के बाद चंचल को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही नाबालिग दोषी को जुवेनाइल होम भेज दिया।

21 सितंबर से शुरू होगी सजा: अदालत के आदेश के तहत नाबालिग दोषी दोपहर 3 से 6 बजे तक पीजीआई में अपनी सेवाएं देगा। इस दौरान उसे अस्पताल में आने वाले मरीजों की सेवा से लेकर अन्य कार्य करवाए जाएंगे। उसकी सजा 21 सितंबर 2015 से शुरू होगी।

ओसिफिकेशन टेस्ट में पाया नाबालिग: पीड़िता के वकील ने दोषी के बालिग (18 वर्ष से ऊपर) होने को लेकर कोर्ट में कई दलील दी थी। उन्होंने उसके जन्म का वर्ष 1996 बताया। इस पर कोर्ट ने उसका ओसिफिकेशन टेस्ट करवाया। इसमें उसे वारदात के वक्त नाबालिग पाया गया था।
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