फतेहगढ़ साहिब के दो किसानों ने कर्ज के बोझ के कारण अपनी जान दे दी। दोनों किसान अलग-अलग गांवों से हैं। मृतक किसानों की पहचान लखवीर सिंह (42) पुत्र जगजीत सिंह निवासी डेरा मीर मीरा और जसपाल सिंह (55) पुत्र जीत सिंह निवासी गांव लोहारी कलां बस्सी पठाना के तौर पर हुई है। लखवीर सिंह ने अपने ही खेतों में लगी मोटर के पास लगे पेड़ पर बुधवार रात को फंदा लगा लिया जबकि जसपाल सिंह ने 2 जून की बाद दोपहर सरहिंद नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली। किसान का शव भाखड़ा नहर के खनौरी हेड से बरामद किया गया है। पुलिस ने दोनों घटनाओं के संबंध में धारा-174 की कार्रवाई की है।
लखवीर पर था छह लाख का कर्ज
मृतक किसान लखवीर सिंह के छोटे भाई कुलदीप सिंह ने बताया कि लखवीर सिंह के पास डेढ़ किल्ला जमीन थी। अपने पिता जीत सिंह के नाम पर उसने सहकारी बैंक से लोन लिया था। एक साल पहले जीत सिंह की मौत के बाद लोन की किश्त रुक गई थी जो ब्याज बढ़ने से छह लाख रुपये से ऊपर हो गई। इससे लखवीर सिंह मानसिक तौर पर परेशान रहने लगा।
बुधवार रात करीब साढ़े नौ बजे लखवीर सिंह घर से बाहर चला गया। वह सारी रात उसे ढूंढते रहे, लेकिन कुछ पता नहीं चला। सुबह होते ही खेत में रखे मजदूर ने उन्हें बताया कि लखवीर सिंह का शव पेड़ से लटक रहा है। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। मृतक लखवीर सिंह की बड़ी बेटी बाहरवीं और बेटा ग्यारहवीं में पढ़ रहा है। परिवार ने सरकार से कर्ज को माफ करने की गुहार लगाई है।
जसपाल सिंह था साढ़े 17 लाख का कर्जदार
जसपाल सिंह था साढ़े 17 लाख का कजर्दार
जसपाल सिंह था साढ़े 17 लाख का कर्जदार
लोहारी कलां के किसान जसपाल सिंह के बेटे जोगिंदर सिंह ने बताया कि उनके पास 4 किल्ले जमीन है। उसके पिता ने एसबीआई से 5.50 लाख, सहकारी बैंक लोहारी से 4 लाख, आढ़ती से 6 लाख और गांव के जान पहचान वालों से करीब 2 लाख रुपये का कर्ज लिया हुआ था।
खेती से फायदा न होने से उसके पिता जसपाल सिंह परेशान रहने लगे थे। दो जून को वह दोपहर में घर से गेहूं पिसवाने के लिए गए थे लेकिन वापस नहीं आए। वीरवार को उनका शव ही उन्हें नहर से मिला। मृतक किसान के दो बेटे शादीशुदा हैं। परिवार ने सरकार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और कर्ज माफ करने की गुजारिश की है।
12 जून को सरकार का घेराव : भट्टी
सिविल अस्पताल फतेहगढ़ साहिब में किसान लखवीर सिंह के पोस्टमार्टम के दौरान परिवार को सांत्वना देने पहुंचे पूर्व शिअद विधायक दीदार सिंह भट्टी ने कहा कि 12 जून को शिरोमणि अकाली दल की ओर से मौजूदा प्रदेश कांग्रेस सरकार को धरना प्रदर्शन कर घेरने की तैयारी की गई है। इसमें जिले के किसानों की आत्महत्या का मुद्दा अहम होगा। क्योंकि विस चुनाव से पहले कांग्रेस ने कर्जा-कुर्की माफ करने के फार्म किसानों से भरवाए थे लेकिन सरकार ने किसी भी किसान का कर्ज माफ नहीं किया।