फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ट्रैफिक चालान से बचना है तो ये खबर जरूर पढ़ें

Tue, 29 Apr 2014 12:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस का दावा है कि मुस्तैदी और चालान के कारण ही हादसों का ग्राफ कम हो रहा है। इस साल अब तक पुलिस ने अलग अलग वायलेंशन के 57 हजार 524 चालान काटे हैं जबकि जनवरी से 27 अप्रैल 2013 तक कुल 36 हजार 314 चालान काटे गए हैं।
विज्ञापन


पुलिस के आंकड़ों पर ध्यान दें तो शहर में सबसे ज्यादा चालक ऐसे पकड़े गए हैं जो कि ट्रैफिक लाइट के सिगनल को तोड़ रहे हैं। जबकि लोअर हेड लाइट बीम के चालानों की संख्या ज्यादा है।

पुलिस के अनुसार रात के समय हाई बीम के कारण हादसे बढ़ते हैं। इस तरह के चालान पुलिस ने इस साल 1628 चालकों के काटे है जबकि पिछले साल 27 अप्रैल तक 789 चालान काटे गए थे। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार पिछले साल अब तक 143 सड़क हादसे हुए थे जबकि इस साल अब तक 122 सड़क हादसे हुए हैं।
विज्ञापन


किस वायलेंशन कितने हुए चालान
वायलेंशन.................................पिछले साल...............इस साल
बिना हेलमेट एवं बिना स्ट्रीपिस...............13815...............15888
बिना सीट बेल्ट.............................4827...............5340
रोंग साइड..........................5646..........................9100
रेड लाइट जंप..........................10961 ..........................25039
ज्यादा आवाज वाले हार्न..........................121.......................... 355
कार चलाने के समय स्मोकिंग..........................93..........................174
नाबालिग द्वारा वाहन चलाना..........................62..........................63

(दोनों वर्षों में ये अवधि एक जनवरी से 27 अप्रैल तक है)

ओवर स्पीड और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर भी सख्ती
इस साल अब तक पुलिस की ओर से शराब पीकर वाहन चलाने और ओवर स्पीड वाहन चलाने वालों के खिलाफ भी अभियान छेड़ा हुआ है। पुलिस ने इस साल अब तक 1399 चालकों के चालान शराब पीकर वाहन चलाने वालों के काटे हैं। जबकि 5543 चालान ओवर स्पीड के काटे हैं।

एसएसपी ट्रैफिक मनीष चौधरी का कहना है कि पुलिस का लक्ष्य हादसों को कम करना है। उनका कहना है कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि इस साल के अंत तक पिछले सालों के मुकाबले में कम लोगों की हादसों में मौत होगी।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें