आतंकी नारायण सिंह चौरा को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जसविंदर सिंह की अदालत ने वीरवार को आर्म्स एक्ट मामले में दो साल की सजा सुनाई है। अदालत ने आतंकी चौरा पर पांच सौ रुपये जुर्माना भी किया। इसके साथ ही अदालत ने चौरा की सजा को अंडरगोन कर दिया।
मामला फरवरी 2004 का है। बुडै़ल जेल ब्रेक मामले में आतंकियों को भगाने में मदद करने पर पुलिस ने आतंकी नारायण सिंह चौरा को गिरफ्तार किया था। पुलिस को दिए बयान में चौरा ने माना था कि उसने पिस्टल सेक्टर-51 के जंगल में छिपाया है। चौरा की निशानदेही पर पुलिस ने पिस्टल और पांच कारतूस बरामद किए थे। पुलिस ने चौरा के खिलाफ सेक्टर-34 थाने में आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज करवाया था।
जांच में पता चला था कि जो पिस्टल चौरा से बरामद हुआ, वह अमृतसर में संतराम की हत्या में इस्तेमाल हुआ है। वहीं बचाव पक्ष के वकील अमर सिंह चहल और तेजिंदर सिंह सूदन ने कहा कि पुलिस ने रिमांड हासिल करने के लिए चौरा के खिलाफ झूठा केस बनाया।
अगले दिन कोर्ट में चौरा ने पुलिस के सामने डिसक्लोजर स्टेटमेंट देने से इंकार कर दिया था। इस मामले में बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूत के आधार पर कोर्ट ने चौरा को दोषी पाया।