मनीमाजरा स्थित तनिष्क शोरूम से 12 करोड़ की डकैती में पुलिस द्वारा पकड़े गए 11 आरोपियों में से जेल में बंद सभी 9 अपराधियों को सोमवार शाम रिहा कर दिया गया।
अदालत में पुलिस इन पर लगाई गई डकैती और आर्म्स एक्ट की धारा साबित नहीं कर सकी। इनके पास से हुई गहनों की रिकवरी के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह इन सभी को तीन-तीन साल की सजा सुनाई।
ये सभी मामले की ट्रायल के दौरान तीन साल तीन दिन की सजा पहले ही काट चुके थे। इस मामले में सरगना पारस सोनी पुलिस हिरासत से फरार हो गया था और वह पहले ही भगोड़ा घोषित है, जबकि एक अन्य नाबालिग आरोपी को जुबानाइल कोर्ट रिहा कर चुकी है।
इस मामले में आरोपियों को 72 घंटे में गिरफ्तार करने का दावा कर चंडीगढ़ पुलिस ने काफी वाहवाही लूटी थी।
कच्ची साबित हुई पुलिस की कहानी
शोरूम में लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से भी पुलिस डकैती के आरोपियों की पहचान नहीं साबित कर पायी। तनिष्क शोरूम का सिक्योरिटी गार्ड स्वर्ण सिंह आरोपियों की पहचान नहीं सका और अपने बयान से पलट गया।
पुलिस ने लुटेरों को हथियारबंद बताया और रिकवरी भी दिखाई थी मगर अदालत में आर्म्स एक्ट को साबित नहीं कर पायी। सिक्योरिटी गार्ड को जहरीला पदार्थ खिलाने और उसे चोट पहुचाने को भी पुलिस साबित नहीं कर सकी।
पुलिस द्वारा बनाई गई डकैती की सारी कहानी अदालत में धरी की धरी रह गई। बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस की कहानी को झूठा साबित कर दिया।
इन्हें मिली थी तीन साल की सजा, हुए रिहा
1. मानव सोनी, निवासी वैशाली, गाजियाबाद
2. भूरा कुरेशी, निवासी मुराद नगर, गाजियाबाद
3. अनुज कुमार, निवासी पिलखुवा, हापुड़
4. नदीम, निवासी पिलखुवा, हापुड़
5.भूरा तोमर, निवासी पिलखुवा, हापुड़
6. सोनू राघव, निवासी पिलखुवा, हापुड़
7. सुरेंद्र सिंह तोमर, निवासी पिलखुवा, हापुड़
8. हरजिंदर सिंह, निवासी पिलखुवा, हापुड़
9. अजय सिंह, निवासी पिलखुवा, हापुड़
(इन सभी पर पुलिस डकैती की धारा साबित नहीं कर सकी)