14 साल की मासूम की दर्दभरी दास्तां सुनकर आपकी आंखों में भी आंसू आ जाएंगे। मामला रोहतक का है। एक पिता ने अपनी बेटी के साथ मिलकर नाबालिग सौतेली बेटी का सौदा कर दिया।
14 वर्ष की मासूम मोनिया (परिवर्तित नाम) किसी तरह चंगुल से बचकर भागी। मोनिया ने बताया कि उसे पिता और बहन के मंसूबों की भनक लगी तो वह भागकर हरिद्वार चली गई।
भीख मांग कर गुजारा करने वाली एक युवती सुमन और उसके भाइयों ने कुछ दिनों बाद उसे भिवानी छोड़ दिया। यहां से वह रोहतक आ गई और शुक्रवार को पुलिसकर्मी दिखाई दिया तो हिम्मत जुटाकर उसे आपबीती कह डाली। लड़की की मांग पर उसे हरिओम सेवा दल के आश्रम में भेज दिया गया है।
हरिओम सेवादल के आश्रम में लाई गई मोनिया ने बताया कि 3 माह पहले वह खोखराकोट क्षेत्र में एक मकान में किराए पर रहते थे। उसके सौतेला पिता (मां का दूसरा पति) मूल रूप से सोनीपत का रहने वाला है और शराबी है। उसके भाई छोटा मोटा काम करते थे।
भागकर जान बचाई, पुलिस को आपबीती सुनाई
लड़की ने बताया कि उसकी सौतेली बहन और उसके पिता ने उसे खरैंटी गांव में बेच दिया। रात को गांव में ले जाया गया तो वह जैसे-तैसे वहां से भाग निकली। सिटी थाना पुलिस में शिकायत दी। शिकायत के बाद खरैंटी वालों ने उसे परेशान नहीं किया।
दोबारा घर नहीं गई और एक भीख मांगने वाली लड़की के साथ हरिद्वार चली गई। यहां उसने भी भीख मांगना शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद वे उसे भिवानी छोड़कर चले गए। यहां कई दिन रहने के बाद मोनिया वापस रोहतक आ गई।
शुक्रवार को सुखपुरा चौक पर अकेली बैठी थी कि उसने एक पीसीआर देखी। पीसीआर में वही पुलिसकर्मी था, जिसके पास वह 3 माह पहले सिटी थाने में शिकायत करने पहुंची थी।
उसने पुलिस कर्मचारियों से आग्रह किया कि वह अपने पिता के साथ नहीं रहना चाहती, वह उसके पांव काटने की धमकी देता है। इसलिए वह अनाथ आश्रम में रहना चाहती है और उसे आश्रम में छोड़ दिया गया।
मामले की जांच को पहुंची बाल संरक्षण अधिकारी
बाल संरक्षण अधिकारी पूनम को जब मोनिया की सूचना मिली तो वे उसकी जानकारी लेने आश्रम में पहुंची। पूनम ने बताया कि मोनिया का मेडिकल कराया गया है। अभी लड़की कुछ घबराई हुई लग रही है। वह बार-बार अलग-अलग बातें कर रही है। इसकी दो तीन दिन बाद काउंसिलिंग कराई जाएगी। संभव है स्थिति स्पष्ट हो जाए। परिजनों के बारे में किया गया खुलासा चौंकाने वाला है, इस बारे में बात की जाएगी।
बुखार से ग्रस्त मोनिया के नहीं बंद हो रहे आंसू
घटना का सदमा मोनिया के दिल पर इस कद्र है कि उसके आंसू बंद नहीं हो रहे हैं। उसे बुखार ने भी घेर लिया है। आश्रम में कार्यरत स्टाफ ने बताया कि वह अभी घबराई हुई है। उसे खाना खिलाने के बाद दवा दी गई है।