सीबीआई की ये करतूत जानकर आप चौंक जाएंगे। सीबीआई फीस लेने के मामले को रिश्वत का मामला बनाने का प्रयास कर रही थी।
सीबीआई ने एक स्टडी सेंटर के संचालक के खिलाफ पहले भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। लेकिन जांच में कोई केस नहीं बना।
ऐसे में अपनी गलती छिपाने के लिए सीबीआई ने उस पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर दिया। परिणामस्वरूप संचालक को 10 साल तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़े।
आखिकार स्टडी सेंटर संचालक को बुधवार को जिला अदालत से राहत मिल गई। अदालत ने संचालक को बरी कर दिया और मले को दस साल तक खींचने पर जांच एजेंसी को भी कड़ी फटकार लगाई।
दो छात्रों ने दी थी सीबीआई में शिकायत
मामला 26 जुलाई 2005 को सामने आया था। तमिलनाडु की अलगप्पा यूनिवर्सिटी से एमफिल कर रहे दो छात्रों ने सीबीआई में शिकायत दी थी कि सिटी स्थित यूनिवर्सिटी के कार्यालय में एक कर्मचारी उनसे रिश्वत मांग रहा है।
इसके बाद सीबीआई ने सेक्टर-15 डीएवी मॉडल पब्लिक स्कूल स्थित यूनिवर्सिटी स्टडी सेंटर में ट्रैप लगाकर प्रशांत को गिरफ्तार किया था।
शुरू में सीबीआई ने उसे सरकारी कर्मचारी समझकर भ्र्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया। लेकिन, जांच के दौरान पता चला कि वह सरकारी मुलाजिम नहीं है तो धोखाधड़ी के तहत केस दायर किया।
यह था पूरा मामला
तमिलनाडु की अलगप्पा यूनिवर्सिटी से एमफिल कर रहे छात्रों को नियमों के तहत वाइवा वॉइस के लिए तमिलनाडु के कराईकुड़ी जाना पड़ता था। लंबी यात्रा से छात्रों को खासी परेशानी होती थी। उन्होंने इसके लिए वहां जाने की बजाय यहीं वाइवा कराने का आग्रह किया था। इस पर यूनिवर्सिटी ने कुछ शर्तों पर सहमति दे दी थी।
इसके तहत वाइवा वॉइस की परीक्षा के लिए यूनिवर्सिटी अपने दो पर्यवेक्षकों को यहां भेजेगी। वहीं लोकल लेवल पर एक पर्यवेक्षक स्टडी सेंटर की ओर से मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा यहां आने वाले प्रोफेसरों का खर्च और परीक्षा खर्च स्टडी सेंटर वाहन करेगा। सेंटर ने इसके लिए छात्रों से दो-दो हजार रुपये अतिरिक्त फीस चार्ज की थी।
बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज के मुताबिक उस समय अन्य छात्रों ने फीस के तौर पर खर्चा दिया था। सेंटर ने छात्रों की सुविधा के लिए वाइवा की व्यवस्था की थी। ताकि छात्रों की तैयारी प्रभावित न हो।
इसलिए यह मामला कहीं से भी धोखाधड़ी का नहीं बनता था। सीबीआई ने रिश्वत बताकर जो पांच हजार रुपये प्रशांत से बरामद दिखाए थे, उनमें से दो-दो हजार परीक्षा फीस और पांच-पांच सौ रुपये गाइडेंस फीस थी।