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पुलिस की शर्मनाक करतूत, बेरोजगार बनाया तस्कर

Tue, 02 Sep 2014 04:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
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मई महीने में हेरोइन के साथ पकड़े गए इंटरनेशनल कराटे प्लेयर बलबीर सिंह बाला के मामले में थाना फेज-1 के तत्कालीन एसएचओ एवं आईओ की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है। क्योंकि आरोपी की मां का आरोप है कि उसके बेटे को गलत तरीके से केस में फंसाया गया है।
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इस संबंध में आरोपी की मां ने डीजीपी को शिकायत दी थी। इसके बाद डीजीपी ने मोहाली पुलिस को मामले की जांच करने के आदेश दिए थे। इसी कड़ी में सोमावार को खिलाड़ी, खिलाड़ी की मां एवं पंचायत मेंबरों ने पुलिस को अपने बयान दर्ज कराए।

डीजीपी को दी शिकायत में बलबीर की माता लखमीर कौर ने बताया था कि बलबीर बेरोजगार था। उसने स्पोर्ट्स कोटे के तहत नौकरी के लिए पुलिस में आवेदन भी किया था। लेकिन उसे नौकरी नहीं मिल पाई थी। तभी वह पत्नी के गांव की महिला के संपर्क में आया।
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महिला ने अधिकारी संग मिलकर खेला खेल

महिला ने उसे विश्वास दिलाया कि वह उसे सर्बोर्डिनेट सर्विस सलेक्शन बोर्ड चंडीगढ़ में अच्छे संपर्क हैं। उसने वहां पर अधिकारी से बातचीत कराई। लेकिन उसके लिए उसे 1.50 अदा करने होंगे। बलबीर ने डेढ़ लाख उसे चुका दिए।

इसके बाद वह 24 मई 2014 में बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती रहा। 24 मई 2014 को उक्त महिला व उक्त अधिकारी का दोबारा फोन आया। साथ ही कहा कि 50 हजार तैयार रखो। आपको नौकरी के लिए उनके साथ जाना पड़ेगा।

उसका बेटा संधू अस्पताल भिखीपिंड में दाखिल था। फिर रात दस बजे बलबीर को अपने साथ ले गए। वह उसे फेज-3 मोहाली ले आए हैं। जब 25 मई को उन्होंने बलबीर के फोन पर नंबर मिलाया। तो महिला ने फोन उठाया कि शाम को आपके बेटे को वापस भेजेंगे।
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मां ने अखबार में छपी देखी बेटे की फोटो

माता ने बताया कि उन्होंने 26 मई को अखबारों में छपी देखी। जिसमें कहा गया था कि उनके बेटे पर 150 ग्राम हेरोइन रखने के आरोप में केस दर्ज हो गया है।

अमर उजाला से बातचीत में बलबीर ने बताया कि जब वह मोहाली पहुंचा था, तो उसे सिविल ड्रेस वाली पुलिस ने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद उस पर केस डाल दिया। फिर उसे कागज पर साइन ले लिए गए। वहीं, 90 दिन में पुलिस चालान पेश नहीं कर पाई। इसके बाद उसे जमानत बिल पाई।

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