रामा मंडी थाने की पुलिस की कस्टडी से मंगलवार को फरार हुए नाबालिग के मामले में नया खुलासा हुआ है।
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कानून के नियमानुसार नाबालिग को अदालत में पेश करके सीधा बाल सुधार गृह भेजना होता है, लेकिन जालंधर में पुलिस कस्टडी से फरार हुए नाबालिग को कोर्ट में पेश किया गया और उसको एक दिन के पुलिस रिमांड पर लेकर टार्चर किया गया।
सर्टिफिकेट के अनुसार किशोर है नाबालिग
किशोर की मां सुनीता ने बेटे का बर्थ सर्टिफिकेट दिखाते हुए कहा कि उसका जन्म तीन सितंबर 1997 को हुआ था। यह सर्टिफिकेट पांचवीं कक्षा का है, जिसके मुताबिक किशोर की उम्र 16 साल सात माह है।
पुलिस ने सोमवार को नाबालिग को पकड़ा और नियमानुसार उसको तत्काल अदालत में पेश कर होशियारपुर की बाल सुधार गृह जेल भेजा जाना था। स्थानीय कमिश्नरेट पुलिस की रामामंडी की टीम ने किशोर को रात भर कस्टडी में रखा और उसको इंटेरोगेशन के लिए सीआईए स्टाफ भी भेजा।
आरोप है कि वहां पर उसको करेंट के अलावा मुंह पर जूते मारे गए इससे उसका शरीर सूज गया। मंगलवार को उसको अदालत में पेश किया गया। जहां पर उसको बालिग बताया गया और बाकायदा पुलिस ने पूछताछ के लिए उसका रिमांड मांगा। अदालत ने पुलिस टीम पर विश्वास करते हुए नाबालिग का एक दिन का पुलिस रिमांड दे दिया।
यह है मामला
नाबालिग किशोर बुधवार को सूर्या इंक्लेव चौकी से अचानक गायब हो गया था। चौकी इंचार्ज विजय ने उसकी मां सुनीता को फोन पर बताया था कि बेटे के शरीर व पैर पर सूजन थी।
उन्होंने लाकअप से निकालकर उसको गर्म पानी व मूव लगाकर सूजन को कम करने की कोशिश की थी लेकिन वह कस्टडी से भाग गया। इसके बाद इस मामले में बवाल मच गया।
डेमोक्रेटिक भारतीय समाज पार्टी (डेभसपा) के राष्ट्रीय प्रधान विजय हंस ने इसकी शिकायत डीजीपी सुरेश अरोड़ा व एडीजीपी हरदीप ढिल्लों से की और कहा कि किशोर को इस कदर टार्चर किया गया कि वह भाग निकला।
पुलिस कमिश्नर ने इस केस में जहां चौकी इंचार्ज व मुंशी को सस्पेंड कर दिया वहीं उन पर आपराधिक केस दर्ज कर लिया गया।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
डेमोक्रेटिक भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान विजय हंस ने मांग की कि इस केस में पुलिस अधिकारी अपने मातहत मुलाजिमों को बचाने की कोशिश ही करेंगे।
पहली प्राथमिकता किशोर को खोजने की है, किसी अनहोनी की आशंका से दिल कांप रहा है। इस केस की न्यायिक जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
नाबालिग को रिमांड पर नहीं ले सकती पुलिस
जाने माने क्रिमिनल लॉयर राजेश शर्मा का कहना है कि अगर कोई नाबालिग अपराध करता है तो उसको तत्काल अदालत में पेश करके बाल सुधार गृह भेजने का नियम सुप्रीम कोर्ट ने बनाया है।
अगर पुलिस ने बालिग बताकर रिमांड लिया है तो यह अदालत को गुमराह करने का मामला है, इसमें पुलिस मुलाजिमों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
एडीसीपी नरेश डोगरा का कहना है कि हम खुद जांच करेंगे कि किशोर की उम्र कितनी थी। बेशक उसकी मां सुनीता ने सर्टिफिकेट दिखाया है लेकिन पुलिस अपने स्तर पर तहकीकात कर नगर निगम या अन्य स्थानों से उसकी उम्र के सर्टिफिकेट हासिल करेगी। अगर उम्र नाबालिग है तो दोषी मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।