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आश्रम में युवती का समलैंगिक विवाह, शोषण

Fri, 05 Dec 2014 05:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चरखी दादरी
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आश्रम में साध्वियां सवा साल से युवती का यौन शोषण कर रही थीं। कहानी सुन जांच टीम सकते में आ गई। घटना हरियाणा के चरखी दादरी की है।
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स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम के समक्ष साढ़े 17 वर्षीय पीड़ित लड़की ने साध्वियों के खिलाफ आरोपों की ऐसी झड़ी लगाई कि जांच से जुड़े लोग भी सकते में आ गए। तारीख दर तारीख का ब्योरा देते हुए पीड़िता ने पिछले सवा साल से यौन शोषण की बात कही।

चेतना संगठन अध्यक्ष ने किशोरी के लिखित में दर्ज बयान के हवाले से बताया कि समलैंगिक विवाह से पहले ही आश्रम की एक साध्वी ने यौन उत्पीड़न किया। 12 अगस्त 2013 को किशोरी का पहली बार यौन शोषण किया गया।
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किशोरी ने टीम के समक्ष बताया कि पहली बार यौन उत्पीड़न के दो महीने बाद यानी अक्तूबर 2013 को आश्रम की एक साध्वी के साथ किशोरी का समलैंगिक विवाह कर दिया गया। शादी आश्रम में बनी श्रीकृष्ण की प्रतिमा को साक्षी मानकर कराई गई। बाकायदा शादी की माला डलवाई गई। बाद में उक्त साध्वी व किशोरी को पति-पत्नी बनकर रहने को कहा गया।

सहायक साध्वी से समलैंगिक विवाह

युवती ने आरोप लगाया कि शादी के बाद तो उसके साथ पति के रूप में रह रही साध्वी ने कई बार यौन शोषण किया। किशोरी ने आश्रम की प्रमुख साध्वी पर भी यौन शोषण के आरोप लगाए।

चेतना संगठन अध्यक्ष सुशील वर्मा ने किशोरी के दर्ज बयानों के आधार पर बताया कि एक रात तो प्रमुख साध्वी व पति बनी साध्वी ने मिलकर उसके साथ यौन शोषण किया। किशोरी पर पति बनी साध्वी ने यह दबाव बनाया कि प्रमुख साध्वी को खुश रखना भी जरूरी है।

वर्मा ने बताया कि बयानों में यह भी बात उभरकर सामने आई कि प्रमुख साध्वी ने सहायक साध्वी से समलैंगिक विवाह कर रखा था। किशोरी ने जांच अधिकारियों के समक्ष लिखित में बताया कि तीन जनवरी 2014 को रात के समय सर्कस देखकर लौटने पर प्रमुख साध्वी व सहायक एवं पति बनी साध्वी ने उसकेसाथ यौन उत्पीड़न किया।

डीएसपी (हेड क्वार्टर) अमित भाटिया ने बताया कि इसके लिए गठित एसआईटी कमेटी जो फैसला करेगी उसके आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनकी मौजूदगी में किशोरी व साध्वी से पूछताछ की गई है।
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आश्रम की ओर से रिचार्ज होता था मोबाइल

किशोरी ने लिखित में बताया है कि किशोरी को साध्वी ने अलग से मोबाइल सिम दे रखा था। उसे इस नंबर से ही बात करने को कहा गया था। आश्रम की ओर से ही इस सिम को रिचार्ज करवाया जाता था।

आश्रम में ही रहने पर दबाव बनाया जाता था। कॉलेज जाने से भी यह कहकर रोका जाता था कि आश्रम की पढ़ाई ही जीवन में काम आएगी। किशोरी की साइकिल को अंदर एक अलग कमरे में रखा जाता था।

साध्वियों ने नकारे आरोप
जांच अधिकारियों की टीम ने प्रमुख व सहायक साध्वी के भी बयान दर्ज किए। बयानों में दोनों ने इन आरोपों को नकार दिया। साध्वी ने जांच अधिकारियों के समक्ष बताया कि आश्रम में केवल धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। साध्वी ने जांच टीम के समक्ष यौन शोषण व समलैंगिक विवाह जैसे आरोपी को सिरे से खारिज कर दिया।
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