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चाय वाले ने निभाया फर्ज और बच गई हजारों बेटियों की जान

Sun, 12 Jul 2015 11:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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एक चाय वाले ने इंसानियत का धर्म निभाते हुए सटीक जानकारी दी और हजारों बेटियों को मरने से बचा लिया। एक नर्सिंग होग में लिंग जांच का धंधा चल रहा था, जिस पर पुलिस ने स्वास्थ विभाग की टीम के साथ मिलकर छापा मारा और गोरखधंधे का भंडाफोड़ किया। मामला हरियाणा में सोनीपत का है। गैर कानूनी तरीके से लिंग जांच का धंधा भाटिया नर्सिंग होम में चल रहा था।
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विभाग के मुताबिक मौके से जरूरी कागजात और दो अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त कर सील कर दी गई हैं। पूरे मामले में जब नर्सिंग होम के मालिक डॉ. धर्मपाल भाटिया से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल नंबर स्विच ऑफ मिला।

उधर, गन्नौर डीएसपी सतीश शर्मा का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर डॉ. भाटिया के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई है। रविवार को आरोपी डॉक्टरों को पहले नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
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विशेष टीम तैयार कर मारा गया छापा
सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया ने बताया कि गन्नौर स्थित भाटिया नर्सिंग होम में अवैध रूप से लिंग जांच और गर्भपात को लेकर स्वास्थ्य विभाग को कई दिन से सूचना मिली रही थी। शनिवार को डॉ. पूनिया ने उपायुक्त राजीव रतन से बात की। इसके बाद सीटीएम सुधांशु गौतम के नेतृत्व में विशेष टीम तैयार की गई।

ऐसे हुआ गोरखधंधे का भंडाफोड़

सिविल सर्जन ने बताया कि छापा मारने से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक नकली ग्राहक को तैयार किया। इसके बाद गठित टीम ने सबसे पहले गुप्त तरीके से बिचौलिए से संपर्क साधा। फिर बिचौलिए के जरिए लिंग जांच के लिए नकली महिला ग्राहक को नोटों पर हस्ताक्षर करके अस्पताल भेज दिया। यहां भ्रूण की लिंग जांच के लिए 10 हजार रुपये में बात पक्की हो गई।

बातचीत के तुरंत बाद महिला को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए ले जाया गया। यहां तुरंत ही भ्रूण की लिंग जांच की गई और अगले दिन यानी रविवार को इसके परिणाम के बारे में बताने को कहा गया। जैसे ही नकली महिला ग्राहक ने बाहर निकलते टीम को इशारा किया तो टीम ने तुरंत अस्पताल में छापा मारा। टीम को हस्ताक्षरयुक्त दस हजार रुपये के नोट मौके से बरामद कर लिए गए। जिसमें डॉक्टर की जेब से 500 तथा बिचौलिए की जेब से 9500 रुपये बरामद किए गए।

फार्म भरने में भी मिली अनियमितताएं
सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल में जांच करने पर पाया गया कि अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाली महिलाओं के फार्म भी गलत भरे गए थे। जिस महिला को भेजा गया उसकी दो बेटियां थी लेकिन डाक्टर ने उसके फॉर्म पर दो बेटियां लिखने की बजाए बेटा लिखा ताकि किसी को कोई शक न हो। इसके अलावा कई अन्य फार्मों में भी अन्य गड़बड़ियां पाई गईं।
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बैठक में ही दिया गया था संकेत

हाल ही में जिला उपायुक्त राजीव रतन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर एक बैठक का आयोजन किया था। बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों को भी शामिल किया गया था। बैठक में उपायुक्त ने सख्त संदेश देते हुए चेतावनी जारी की थी कि जिले में निजी डॉक्टर लिंग जांच के मामले में सक्रिय हैं।

बैठक में इसका भी जिक्र किया गया था कि जिले में कौन-कौन लिंग जांच में लिप्त हैं, उसकी पूरी जानकारी भी प्रशासन के पास उपलब्ध है। बैठक में यह चेतावनी जारी की गई थी कि जो निजी डॉक्टर इस काम में लिप्त हैं, वह जल्द ही संभल जाएं नहीं तो उन्हें बेनकाब किया जाएगा।

जिले में 20 महिला कर्मचारियों पर नजर
जिला प्रशासन ने ऐसी 20 महिलाओं की भी सूची बनाई है जो गुप्त तरीके से लिंग जांच में शामिल हैं। इस तरह की महिलाओं में आशा वर्कर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं। यह बिचौलिया की भूमिका निभाकर लिंग जांच में लिप्त हैं। जल्द ही प्रशासन इन महिलाओं के ऊपर भी कार्रवाई कर भंडाफोड़ करने की जुगत में है।

लिंग जांच के संबंध में पहले से सूचना मिल रही थी। छापा मारने के बाद एक टीम बनाई गई। छापे के बाद सभी जानकारी सही पाई गई। डॉक्टर के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। 13 जुलाई को डॉक्टर और नर्सिंग होम के खिलाफ कोर्ट केस दर्ज किया जाएगा।
- डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन
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