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बहुचर्चित PPSC घोटाले का पूरा सच चौंकाने वाला

Thu, 09 Apr 2015 05:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
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बहुचर्चित पंजाब लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाला 25 मार्च 2002 में उस समय सामने आया जब विजिलेंस ब्यूरो ने पंजाब लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन रवि सिद्धू को सेक्टर 39 स्थित उसके आवास से गलत सिलेक्ट किए एक उम्मीदवार की तरफ से पांच लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
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मामले के सामने आने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने जब जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। खुलासा हुआ कि रवि सिद्धू ने अपने कार्यकाल दौरान पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों में भर्ती के लिए 4000 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी, जिनमें पीसीएस (एग्जेक्टिव), पीसीएस (जुडीशियल), पीसीएस नामीनेशन, डीएसपी और अन्य अलाइड सर्विसेज शामिल हैं।

जांच में सामने आया कि इनमें ज्यादातर भर्तियां पैसे लेकर की गई हैं और यह सारा घोटाला रवि सिद्धू पिछले काफी समय से तत्कालीन सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह व कुछ बिचौलियों व पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के कुछ प्रोफेसरों के साथ मिल कर रहा था। जांच दौरान विजिलेंस ब्यूरो को रवि सिद्धू के चंडीगढ़ स्थित बैंक लाकरों से 8.16 करोड़ कैश मिला था। इसके अलावा बेनामी संपत्तियों, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और शेयरों में निवेश के तौर पर भी 25 करोड़ से अधिक की रिकवरी विजिलेंस ब्यूरो ने की थी।
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इसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने 30 अप्रैल 2002 को रवि सिद्धू समेत आयोग के तत्कालीन सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह निवासी आर्य समाज पटियाला, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के प्रोफेसर जसपाल सिंह निवासी बुढ़लाडा जिला मानसा, पीयू चंडीगढ़ से ही प्रोफेसर जगदीश कालरा निवासी चंडीगढ़, पीयू चंडीगढ़ से प्रोफेसर गुरपाल सिंह निवासी अर्बन एस्टेट पटियाला, मौजूदा पीसीएस आफिसर पुरुषोत्तम सिंह सोढ़ी निवासी मोहाली, बिचौलिए परमजीत सिंह उर्फ पम्मी निवासी चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर अमरजीत सिंह कंग निवासी चंडीगढ़, रवि सिद्धू की मां प्रितपाल कौर के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 471, 120-बी, 34 आईपीसी और 13 (1) (2) आफ प्रिवेंशन आफ क्रप्शन एक्ट के तहत पटियाला विजिलेंस ब्यूरो थाने में केस दर्ज किया था।
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13 साल बाद मिला इंसाफ

बहुचर्चित पंजाब लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में मंगलवार को पटियाला की एक अदालत ने पूर्व चेयरमैन रविंदरपाल सिंह सिद्धू (रवि सिद्धू) को सात साल की कैद और एक करोड़ जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि पूर्व सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह व बिचौलिए परमजीत सिंह उर्फ पम्मी को चार-चार साल कैद और एक अन्य दोषी मौजूदा पीसीएस अधिकारी पुरुषोत्तम सिंह सोढ़ी को दो साल कैद की सजा सुनाई।

इन चारों को पटियाला में स्पेशल जज पुश्पिंदर सिंह की कोर्ट ने सोमवार को पीपीएससी भर्ती घोटाले में दोषी करार दे दिया था। अदालत ने दो आरोपी पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के प्रोफेसर जसपाल सिंह निवासी बुढ़लाडा जिला मानसा और पीयू चंडीगढ़ से ही प्रोफेसर गुरपाल सिंह निवासी अर्बन एस्टेट फेज-एक पटियाला को बरी कर दिया था। तीन आरोपियों की केस की सुनवाई दौरान मौत हो चुकी। इनमें मुख्य दोषी रवि सिद्धू की मां प्रितपाल कौर भी शामिल थी।

कोर्ट की ओर से सुनाए फैसले के मुताबिक रवि सिद्धू निवासी चंडीगढ़ को 120-बी आईपीसी यानि साजिश रचने के दोष में दो साल की कैद, एक हजार जुर्माना, 7 पीसी एक्ट रेड विद 120-बी आईपीसी के तहत चार साल व पांच हजार जुर्माना, 13 (2) कमीशन आफ आफेंस अंडर सेक्शन 13 (1) (ए) आफ पीसी एक्ट रेड विद 120-बी आईपीसी के तहत सात साल कैद, एक करोड़ जुर्माना, 465 आईपीसी यानी जाली कागजात तैयार करना के तहत दो साल कैद, 1000 रुपये जुर्माना, 471 आईपीसी यानी जाली कागजात को सही बताकर इस्तेमाल करना के तहत दो साल कैद और एक हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह निवासी आर्य समाज पटियाला को साजिश रचने के दोष में दो साल कैद, एक हजार जुर्माने, 7 प्रिवेंशन आफ क्रप्शन एक्ट में तीन साल कैद, पांच हजार जुर्माने, 13 (2), 13 (1) (ए) पीसी एक्ट में चार साल कैद, 10 हजार जुर्माने, 465 आईपीसी में दो साल कैद और एक हजार जुर्माने, 471 आईपीसी के तहत दो साल कैद व एक हजार जुर्माने की सजा हुई है।

बिचौलिए परमजीत सिंह पम्मी को 120-बी में दो साल कैद, एक हजार जुर्माना, सात पीसी एक्ट में तीन साल कैद व पांच हजार जुर्माना, 13 (2) 13 (1) (ए) पीसी एक्ट में चार साल कैद व 10 हजार जुर्माना, 465 में दो साल कैद व एक हजार जुर्माना और 471 में दो साल कैद और एक हजार जुर्माने की सजा हुई है। वहीं पीएस सोढ़ी को 12 पीसी एक्ट में दो साल की कैद व 5000 रुपये जुर्माने की सजा हुई।
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