बहुचर्चित पंजाब लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाला 25 मार्च 2002 में उस समय सामने आया जब विजिलेंस ब्यूरो ने पंजाब लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन रवि सिद्धू को सेक्टर 39 स्थित उसके आवास से गलत सिलेक्ट किए एक उम्मीदवार की तरफ से पांच लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
मामले के सामने आने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने जब जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। खुलासा हुआ कि रवि सिद्धू ने अपने कार्यकाल दौरान पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों में भर्ती के लिए 4000 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी, जिनमें पीसीएस (एग्जेक्टिव), पीसीएस (जुडीशियल), पीसीएस नामीनेशन, डीएसपी और अन्य अलाइड सर्विसेज शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि इनमें ज्यादातर भर्तियां पैसे लेकर की गई हैं और यह सारा घोटाला रवि सिद्धू पिछले काफी समय से तत्कालीन सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह व कुछ बिचौलियों व पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के कुछ प्रोफेसरों के साथ मिल कर रहा था। जांच दौरान विजिलेंस ब्यूरो को रवि सिद्धू के चंडीगढ़ स्थित बैंक लाकरों से 8.16 करोड़ कैश मिला था। इसके अलावा बेनामी संपत्तियों, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और शेयरों में निवेश के तौर पर भी 25 करोड़ से अधिक की रिकवरी विजिलेंस ब्यूरो ने की थी।
इसके बाद विजिलेंस ब्यूरो ने 30 अप्रैल 2002 को रवि सिद्धू समेत आयोग के तत्कालीन सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह निवासी आर्य समाज पटियाला, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के प्रोफेसर जसपाल सिंह निवासी बुढ़लाडा जिला मानसा, पीयू चंडीगढ़ से ही प्रोफेसर जगदीश कालरा निवासी चंडीगढ़, पीयू चंडीगढ़ से प्रोफेसर गुरपाल सिंह निवासी अर्बन एस्टेट पटियाला, मौजूदा पीसीएस आफिसर पुरुषोत्तम सिंह सोढ़ी निवासी मोहाली, बिचौलिए परमजीत सिंह उर्फ पम्मी निवासी चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर अमरजीत सिंह कंग निवासी चंडीगढ़, रवि सिद्धू की मां प्रितपाल कौर के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 471, 120-बी, 34 आईपीसी और 13 (1) (2) आफ प्रिवेंशन आफ क्रप्शन एक्ट के तहत पटियाला विजिलेंस ब्यूरो थाने में केस दर्ज किया था।