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समझौता ब्लास्ट केस: अहम गवाह ने बताया जान को खतरा

Sat, 07 Nov 2015 12:45 AM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, पंचकूला
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समझौता ब्लास्ट के अहम गवाह शेख कलीम ने अपनी जान को खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
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वह शुक्रवार को अपने दोस्त जसप्रीत सिंह के साथ हैदराबाद से हरियाणा के पंचकूला के एनआईए कोर्ट में स्वामी असीमानंद के खिलाफ गवाही देने पहुंचे थे। शेख कलीम ने बताया कि उन्हें जयपुर अदालत में भी पेशी के दौरान एक वकील ने धमकी दी थी।
 
शुक्रवार को एनआईए कोर्ट में आरोपी स्वामी असीमानंद और गवाह शेख कलीम न्यायाधीश रवि कुमार सौंधी के समक्ष पेश हुए। शेख कलीम ने गवाही के दौरान अपने बयान पर कायम रहने की बात कही। इस मामले में अभी तक 153 पेशियां हो चुकी हैं।
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शुक्रवार को एनआईए के वकील आरके हांड़ा के अलावा असीमानंद की ओर से एडवोकेट सुभाष चंद्र शर्मा रतगल, मुकेश गर्ग, मनवीर राठी, रणवीर खरकाली और अन्य कई वकील पेश हुए।

कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 20 नवंबर तय की है। इस पेशी पर असीमानंद के अलावा चार अन्य गवाह पेश होंगे। गौरतलब है कि शेख कलीम की पिछली पेशी जयपुर राजस्थान में 3 नवंबर हुई थी।
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हैदराबाद जेल में असीमानंद के साथ 4 दिन गुजार चुका है शेख कलीम

इसलिए अहम है शेख की गवाही: हैदराबाद जेल में असीमानंद के साथ चार दिन गुजार चुके शेख कलीम ने अपने बयान में कहा था कि मुझसे बातचीत में असीमानंद ने समझौता ट्रेन धमाके में संलिप्त होने की बात स्वीकार करते हुए कहा था कि उसने जो किया वह गलत था। इसके लिए पर उन्हें दुख है। असीमानंद की इसी चर्चा पर शेख की गवाही समझौता ट्रेन धमाकों के केस में शामिल की गई है।
 
असीमानंद से मिलने की इच्छा जताई: गवाही के बाद शेख कलीम ने एनआईए के अधिकारी राम गोपाल शर्मा के सामने स्वामी असीमानंद से मिलने की इच्छा जताई। लेकिन इससे पहले स्वामी असीमानंद को पुलिस की निगरानी में कोर्ट से ले जाया जा चुका था।
 
कौन है शेख कलीम
लॉ ग्रेजुएट शेख कलीम मूलरूप से हैदराबाद के रहने वाले हैं। वह न्यायाधीश बनने के लिए परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। शेख कलीम के खिलाफ पूर्व में पांच आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनसे वह बरी हो चुके हैं। इनमें से एक मामले में वह 2007 में असीमानंद के साथ चार दिन जेल में रह चुके हैं।
 
बरी हुआ तो गीता जन्मस्थली के करूंगा दर्शन
असीमानंद ने पेशी से पूर्व वकीलों के अलावा काफी देर तक हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं से धर्म और कुछ विशेष अन्य मसलों पर गुफ्तगू की। इस दौरान उन्होंने केस से बरी होने पर गीता जन्मस्थली कुरुक्षेत्र के दर्शन करने की भी इच्छा प्रकट की।
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