नवजात बच्चे की इलाज के दौरान मौत होने से पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज(पिम्स) अस्पताल में सोमवार को हंगामा हो गया। परिजनों ने बच्चे की मौत का कारण डॉक्टरों की लापरवाही बताया है।
मिट्ठा बाजार के सुरेश बाहरी ने बताया कि 11 अप्रैल को एक प्राइवेट अस्पताल में उनके दो बेटे हुए थे। दोनो बच्चे सातवें माह में जन्मे थे इसलिए वो दोनों को लेकर पिम्स अस्पताल आए।
दोनों में से एक बच्चा तो 2 माह पहले ठीक होकर घर आ गया लेकिन दूसरे बच्चे को छुट्टी नहीं दी गई। सोमवार उनको सुबह 8.30 बजे फोन आया कि उनका बच्चा सीरियस है। जब वे 10.30 बजे के करीब अस्पताल पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि बच्चे की सुबह साढ़े आठ बजे ही मौत हो चुकी है।
मौत पर अस्पताल प्रशासन का जवाब
बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे की मौत डॉक्टरों की लापरवाही के कारण हुई है। उन्होंने अपने बच्चे की हालत जानने के लिए कई बार अस्पताल के डॉक्टर जतिंदर को फोन किए लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे के इलाज में चार से साढ़े चार लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
पिम्स की प्रिंसिपल कुलविंदर कौर के अनुसार जब परिजन बच्चे को पिम्स लेकर आए थे तो बच्चे की हालत नाजुक थी। हमने इसे पीजीआई जाने के लिए कहा था, मगर परिजन नहीं माने। बच्चा अंडर वेट था और उसे निमोनिया भी था। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की थी बच्चे को बचाने की।
बच्चे के इलाज में जो चार-साढ़े चार लाख का खर्च आने की बात कही जा रही है, वह सही नहीं है। फिर भी इस मामले की जांच की जाएगी। इसकी रिपोर्ट 15 दिन में सबके सामने लाई जाएगी और कसूरवार को बख्शा नहीं जाएगा।