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नादान उम्र में सहना होगा मां बनने का दर्द

Thu, 02 Oct 2014 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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यह उम्र उसकी खेलने-कूदने की है, स्कूल जाकर अपने सपनों को नया मुकाम देने की है, लेकिन 14 वर्ष की नादान उम्र में दुराचार पीड़ित किशोरी के ऊपर उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को संभालने का पहाड़ टूट पड़ा है।
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कोर्ट की रजामंदी के बावजूद नियमों का हवाला देकर डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से बिना गर्भपात के बैरंग लौटा दिया। अब उसके परिजनों को यही गम खाए जा रहा है कि आखिर क्या होगा इस किशोरी और उसके बच्चे के भविष्य का।
 
अब कौन अपनाएगा बच्चे को
बरवाला क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग से दुराचार मामले में यदि पीड़िता बच्चे को जन्म देती है तो उसका और उसके होने वाले बच्चे के भविष्य का क्या होगा। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, ऐसे में बच्चे की परवरिश कैसे होगी।
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उसकी मां तो खुद एक नासमझ है तो कौन उसे मां का प्यार देगा। परिवार को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानी के दौर से गुजरना पड़ रहा है, इसकी भरपाई कैसे होगी।
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यहां है पेंच

कोर्ट ने गर्भपात करवाने के लिए ऑर्डर में लिखा है कि कानून के मुताबिक (एज फार लॉ) पीड़िता का गर्भपात करवाया जाए। गर्भपात संबंधी कानून में लिखा गया है कि 12 सप्ताह के गर्भ का एक डॉक्टर की देखरेख में गर्भपात करवाया जा सकता है।

12 से 20 सप्ताह तक के गर्भ को गिराना हो तो कम से कम 2 डॉक्टरों की टीम नियुक्त करनी होगी। इसके अलावा अगर 20 सप्ताह से ज्यादा का गर्भ होगा तो क्या होगा इसके लिए कानून के तहत कोई निर्देश नहीं है। पीड़िता का गर्भ 24 सप्ताह का है। हालांकि गर्भपात तब किया जा सकता है जब गर्भवती उस स्थिति में नहीं है कि वह बच्चे को जन्म दे सके।
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हर हाल में गर्भपात करवाना जरूरी

जब एक बच्ची की जान व भविष्य और उसके परिवार के मान-सम्मान की बात है तो कानून को छूट देनी चाहिए। नाबालिग का परिवार राजी है तो हर हाल में गर्भपात करवाना जरूरी है।
नाबालिग के साथ जो गलत हुआ है वह घोर निंदनीय है। ऐसे आरोपी को तो कठोर से कठोर सजा देनी चाहिए। ऐसे मामलों में समाज के लोगों को भी सहयोग करना चाहिए। समाज को गंदा करने वालों को दंडित किया जाना जरूरी है।
- सुदेश चौधरी, महिला प्रधान, सतरोल खाप
 
वर्जन
गर्भवती की समय-समय पर जांच जरूरी है। ऐसी हालत में गर्भवती को सावधानी बरतनी चाहिए। वैसे तो कई बार ऐसे केस होते हैं जब लड़कियां 14-15 साल में मां बन जाती हैं, लेकिन उनकी देखभाल बेहद जरूरी है। कम उम्र में मां बनने पर कई तरह के खतरे होते हैं और भविष्य में भी उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
- डॉ. ऋतु अग्रवाल, मेडिकल ऑफिसर
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