पंजाब यूनिवर्सिटी में रैगिंग रोकने की कोशिशें फेल साबित हो रही है। पीयू कैंपस स्थित हॉस्टल में रैगिंग का नया मामला सामने आने से प्रशासन के अधिकारियों की नींद उड़ गई है।
पीयू गर्ल्स हॉस्टल की दो लड़कियों ने सीनियर्स के खिलाफ रैगिंग की लिखित शिकायत दी है। मामले की गंभीरता देखते हुए पीयू प्रशासन को तुरंत एंटी रैकिंग कमेटी की आपात बैठक बुलानी पड़ी। मामले में पीयू प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
बता दें कि पहली बार पीयू कैंपस में लड़कियों ने रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई है। गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग की जीरो टॉलरेंस के सख्त नोटिस दिए हैं। गंभीर स्थिति में पीयू पर कार्रवाई कर यूजीसी ग्रांट तक रोक सकता है।
पहली बार पीयू में लड़कियों से रैगिंग
पहली बार पीयू में लड़कियों द्वारा रैगिंग किए जाने का मामला सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है। जानकारी के अनुसार पीयू के गर्ल्स हॉस्टल नंबर-7 में रहने वाली डिपार्टमेंट ऑफ लॉ में दूसरे वर्ष और एमएससी दूसरे वर्ष की दो छात्राओं ने एक पीएचडी रिसर्च स्कॉलर के खिलाफ रैगिंग की शिकायत दी है।
सूत्रों के अनुसार शिकायत में दोनों छात्राओं ने काफी दिनों से रिसर्च स्कॉलर (सीनियर) पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। दोनों छात्राओं ने इस संबंध में डीएसडब्ल्यू दफ्तर में लिखित शिकायत दी थी। पीड़ित छात्राओं ने शिकायत में रैगिंग की बात भी लिखी है।
रैगिंग करने वालों को दिखाया बाहर का रास्ता
पीयू कैंपस में पहले भी रैगिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं। पीयू प्रशासन ने मामलों में दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की है। पीयू के इंडियन थियेटर विभाग में 2008 में 6 स्टूडेंट्स को रैगिंग में दोषी पाने पर तीन साल के लिए विभाग से निष्कासित कर दिया था।
2010 में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के चार स्टूडेंट्स को रैगिंग करने पर सस्पेंड कर दिया गया था। 2011 में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के ही स्टूडेंट की रैगिंग करने पर साहिल गुप्ता को विभाग और हॉस्टल से सस्पेंड किया था।
कैंपस में रैगिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश हैं। मामले की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रो. नवदीप गोयल, डीएसडब्ल्यू पंजाब यूनिवर्सिटी
छात्राओं ने रैगिंग की शिकायत दी है। कमेटी ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अगर आरोप साबित हुए तो पीयू प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा।
प्रो. नंदिता सिंह, डीएसडब्ल्यू वुमन पंजाब यूनिवर्सिटी