पानीपत बस स्टैंड पर सहकारी समिति की बस में बम धमाके के आरोपी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को अदालत में लाते समय पायलट जिप्सी पंक्चर हो गई, जिससे पुलिस की काफी देर तक सांसें फूली रहीं। मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आठ गवाहों के बयान दर्ज किए।
आठों में से एक गवाह धमाके में अपना पैर गवां देने वाला शामिल रहा। उधर, बम धमाके बचाव पक्ष के वकील ने अदालत के सामने सात की गवाही होने की बात कही है। अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को बुधवार को दिल्ली और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीम विशेष सुरक्षा के बीच अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह की अदालत में सुबह 11 बजे पेश किया गया। जहां पर आठ गवाह पेश किए गए और करीब सवा घंटे तक गवाही चली। अदालत में मामले की अगली सुनवाई चार जून को होगी।
गवाहों में एक घायल और एक ड्राफ्टमैन
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में आठ लोगों ने गवाही दी। इनमें हादसे में घायल लाल सिंह निवासी कालखा, जोगेंद्र निवासी नन्हेड़ा, राजकुमार निवासी कालख सुरेंद्र निवासी चंडीगढ़, राजेंद्र निवासी कालखा, सुरेंद्र निवासी कालखा, हरि सिंह निवासी कालखा व ड्राफ्टमैन जगबीर की गवाही हुई। इस मामले में 52 लोगों की गवाही होनी है, जिनमें से अब तक 15 लोगों की गवाही हो चुकी है।
हरियाणा और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा बम धमाके के आरोपी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को लाया गया। जीटी रोड पर नांगल खेड़ी के पास पायलट जिप्सी में पंक्चर हो गया। पायलट के रुकते ही काफिले की सारी गाड़ियों के पहिए थम गए और पुलिस अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की सांसें फूल गईं। पुलिस अधिकारियों ने पायलट का प्रबंध किया और बम धमाके के आरोपी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को करीब 20 मिनट बाद अदालत में पेश किया।
पानीपत बस स्टैंड पर हुआ था धमाका
पानीपत बस स्टैंड पर एक फरवरी 1997 को शाम करीब 5.15 बजे सहकारी समिति की बस में धमाका हो गया था। इसमें दस वर्षीय माडू की मौत हो गई थी, जबकि 20 लोग घायल हो गए थे। इन घायलों में लाल सिंह निवासी कालखा के दोनों पैर चले गए थे। थाना शहर पुलिस ने इसमें मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने आरोपी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को काबू किया था। उसने पानीपत में बस धमाका करने के आरोप को कबूला था। इसके बाद उसे अदालत में पेश किया गया।
बचाव पक्ष ने अपनी दलील दी: बचाव पक्ष के वकील सुलतान सिंह खर्ब ने न्यायाधीश के सामने अपनी दलील दी। उन्होंने बताया कि बुधवार को न्यायाधीश के सामने गवाह पेश हुए हैं। उन्होंने अब्दुल करीम उर्फ टुंडा को पहचानने से इनकार कर दिया। वे कानूनी रूप से हर पहलू को ध्यान में रखते हुए अपनी दलील न्यायाधीश के सामने रख रहे हैं।