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बैंक में सुरंग से सेंध, 7 अहम बातें

Wed, 29 Oct 2014 10:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गोहाना
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पुलिस महानिदेशक एसएन वशिष्ट ने गोहाना के पंजाब नेशनल बैक में सुरंग बनाकर लॉकरों से करोड़ों रुपये मूल्य के आभूषणों की चोरी की घटना में संलिप्त आरोपियों की सूचना देने वाले को इनाम देने की घोषणा की है।
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सुराग देने वाले को पुलिस 10 लाख रुपये का इनाम देगी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि गोहाना में हुई चोरी के मामले को सुलझाने के लिए पुलिस संभव प्रयास कर रही है।

सूचना देने के लिये डीएसपी गोहाना 8053882304, एसआइटी गोहाना के मोबाइल नंबर 8053882351, स्पेशल स्टॉफ सोनीपत के मोबाइल नंबर 8053882399, सीआईए के मोबाइल नंबर 8053882310, पुलिस अधीक्षक कार्यालय के नंबर 0130.2222903, 2222906, 2222907 पर सूचना दी जा सकती है। सूचना देने वाले का नाम व पता गुप्त रखा जाएगा।
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77 ग्राहकों के तोड़े हैं लॉकर

मंगलवार को बैंक ने पुलिस को चोरी के शिकार जिन लॉकर धारक ग्राहकों की सूची सौंपी, उसमें अंतिम रूप से 77 की संख्या दी गई है। बैंक प्रबंधन अपने आला अधिकारी एनके शर्मा से पूरे मामले की अपने स्तर पर जांच करवाएगा। वहीं दूसरी तरफ 4 महीने से खाली पड़े चीफ मैनेजर के पद पर विनोद माथुर को बैठा दिया गया है।

सोमवार की सुबह 10 बजे बैंक खुलने पर जब सुरंग से लॉकरों में चोरी हुई उनकी संख्या 181 से 268 तक के 88 लॉकरों थी। लेकिन मंगलवार को जो फाइनल लिस्ट पुलिस को दी गई, उसमें लॉकर धारकों की संख्या 77 बताई।

लॉकर संख्या 188, लॉकर संख्या 255 नहीं तोड़ गया। 9 लॉकर, जिनके नम्बर 183, 189, 195, 221, 222, 225, 230, 233 और 236 या तो खाली थे अथवा बैंक के अपने प्रयोग में थे। गोहाना सिटी थाने में अब अज्ञात आरोपियों के साथ स्वयं बैंक के अधिकारियों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

गोहाना के दवाई स्टोर संचालक संदीप कालड़ा पुत्र दर्शन लाल कालड़ा के बयान पर दर्ज हुआ है। मामला पंजाब नेशनल बैंक के महाप्रबंधक, सहायक महाप्रबंधक और गोहाना ब्रांच के मैनेजर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 457, 380 और 120-बी के तहत दर्ज किया गया है।

आरोपियों सहित बैंक अधिकारियों पर केस दर्ज

पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में सुरंग के जरिये की गई लूट को लेकर जिन लोगों के पैसे व गहने इस वारदात में गए है उन लोगों के दिलों पर पत्थर रखा हुआ है। वह बस कुछ कह नहीं पा रहे हैं और एक ही बात कहते हैं कि उनको उनका पैसे और गहने वापस चाहिए। लेकिन लोगों के द्वारा ये नहीं बताया जा रहा है कि उनका कितना कैश था और कितनी कीमत के जेवरात थे।

बैंक में लॉकर ले रखा था उसमें रखे जेवरात व पैसे लूट लिए गए। लाखों रुपये की नकदी व जेवरात बैंक के लॉकर में थे। अब क्या करेंगे, ये ही सोच के दो दिन से बुरा हाल है। ज्ञात हो कि सोमवार सुबह पुराने बस स्टैंड स्थित पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा से सुरंग बनाकर लॉकर तोड़ने का मामला सामने आया था।

लॉकर से करोड़ों रुपये के जेवरात और नकदी चोरी की गई थी। बैंक के साथ में ही बंद पड़े मकान से चोरों ने सुरंग बनाई थी। लॉकर तोड़ने की इस वारदात के बाद पीड़ित लोगों ने सोमवार को ही बैंक के बाहर धरना दिया था और जाम भी लगाया था।

कुछ भी कहने से बच रहे हैं बैंक अधिकारी

अधिकारियों का कहना है कि फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट ने वारदात स्थल की जांच तो की थी, लेकिन फिंगरप्रिंट से कितनी मदद मिल सकती है कहा नहीं जा सकता।

बैंक अधिकारी जहां कुछ कहने से बच रहे हैं, वहीं पुलिस भी इसे जांच का विषय बता रहे हैं। घटना के बाद मंगलवार को डीजीपी श्रीनिवास वशिष्ट ने वारदात स्थल का निरीक्षण कर बंद मकान में बनी सुरंग से लेकर स्ट्रांग रूम तक का निरीक्षण किया।

प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भी मौके पर पहुंचे। इस घटना के विरोध में पीड़ितों ने बैंक के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। पीड़ितों के पक्ष में वकीलों ने एक दिन का वर्क सस्पेंड रखा और अनाज मंडी में भी विरोध स्वरूप धान की बोली रुकवाई गई।

एक पीड़ित ने बैंक अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। पीड़ितों को सांत्वना देने और मौके मुआयना करने आए कैबिनेट मंत्री, डीजीपी और अन्य लोगों को धरने पर बैठे लोगों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनके जेवरात और पैसे वापस नहीं मिल जाते, तब तक वे धरने पर ही बैठे रहेंगे।

बैंक की सुरक्षा पर उठने लगे सवाल

पंजाब नेशनल बैंक के लॉकर से करोड़ों के जेवरात और नकदी चोरी करने के विरोध में जहां पूरा शहर एकजुट हो गया है वहीं बैंक में सुरक्षा मानकों की किस तरह अनदेखी की गई थी, उसकी भी परतें खुलने लगी हैं।

पुलिस के अनुसार बैंक में सुरक्षा के लिए न तो किसी तरह का अलार्म लगवाया गया था, न ही रात को बैंक में किसी सुरक्षा गार्ड को तैनात किया गया था। बैंक में दिन में ही सुरक्षा गार्ड तैनात रहता था।

बैंक बंद होते ही गार्ड की भी छुट्टी हो जाती थी। बैंक के स्ट्रांग रूम का फर्श भी साधारण फर्श का बना था, जबकि यह सॉलिड कंक्रीट का होना चाहिए था। वारदात के बाद फिंगरप्रिंट लेने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

आरोपियों को नहीं छोड़ा जाएगा

रोहतक रेंज के आईजी अनिल राव ने कहा कि चाहे आरोपी बाहर के हैं या फिर अंदर के, उनको छोड़ा नही जाएगा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना बड़ा मुश्किल काम है। ऐसे कार्य में किसी बैंक के अधिकारी को अवश्य साथ लिया गया है, उनकी भी इस लूट में मिलीभगत है।

उन्होंने कहा कि अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। एक केस बैंक अधिकारियों पर भी दर्ज किया गया है। अब चैन लेने का समय नहीं है।

वे यह गारंटी तो नहीं देंगे कि एक मिनट या दो मिनट में आरोपी गिरफ्तार हो जाएंगे, लेकिन यह वचन जरूर देंगे कि किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा और जल्द से जल्द पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की मदद से ही वह इस केस को ट्रेस कर पाएंगे। इस मौके पर एसपी अरुण नेहरा भी मौजूद रहे।

बेमियादी धरना, डीसी ने की मुलाकात

चोरी के पीड़ित बैंक के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। ग्राहकों का कहना है कि तब तक व बैंक नही खुलने देंगे तब तक उनके पैसे और जेवरात वापस नहीं दिया जाता।

सोनीपत के उपायुक्त समीरपाल सरो ने पीड़ित ग्राहकों से 4 नवंबर तक का समय मांगा है। उन्होंने पीड़ित ग्राहकाें के पांच प्रतिनिधियों को बुधवार सुबह 10 बजे कैंप कार्यालय में बुलाया है।

डीसी जब मौके पर पहुंचे तो धरने पर गोहाना हलके के कांग्रेस विधायक जगबीर सिंह मलिक, बरोदा के कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा और इनेलो डॉ. केसी बांगड़ भी बैठे थे।

पीड़ित ग्राहकों ने डीसी से मांग की कि वह अभी दो घोषणा चाहते हैं। पीड़ित बैंक ग्राहकों के लिए 10 लाख की अंतरिम राहत दे और आरोपी कब तक पकड़े जाएंगे यह बताए। डीसी ने लोगों से सात दिन अगले मंगलवार चार नवंबर तक का समय मांगा।

उन्होंने कहा कि इस दौरान आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा अन्यथा पीड़ितों को अंतरिम राहत दिलवाने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि उनके साथ पांच पीड़ित बैंक ग्राहकों चले।

वे पंजाब नेशनल बैंक के चेयरमैन से लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के प्रत्येक उस आला अधिकारी से मिलेंगे जो अंतरिम राहत प्रदान की स्थिति में होगा। पीड़ित ग्राहकों के पांच प्रतिनिधियों को उपायुक्त ने बुधवार को सुबह 10 बजे सोनीपत में अपने कैंप कार्यालय में बुलाया है।

पूरे प्लान के साथ की गई चोरी

बंद मकान में रसोई का रोशनदान तोड़कर घुसना, लगभग सवा सौ फुट लंबी सुरंग, बैंक का स्ट्रांग रूम, लाकर तोड़कर करोड़ों रुपये के जेवरात और नकदी चोरी, ये किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं है। बल्कि पूरे प्लान के साथ की गई चोरी है। गोहाना के पुराने बस स्टैंड स्थित पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा में इस चोरी को अंजाम दिया गया।

फिल्मी स्टाइल में चोरों ने पहले तो एक बंद पड़े मकान को अपना अड्डा बनाया। बैंक और इस मकान के बीच एक गली का ही अंतर था, जिसे चोरों ने सवा सौ फुट लंबी सुरंग बनाकर नाप लिया। सुरंग बनानी शुरू की मकान के अंदर से और दूसरी तरफ निकले सीधे बैंक के स्ट्रांग रूम में।

स्ट्रांग रूम में रखे लाकरों पर धावा बोला और 90 लाकर तोड़कर करोड़ों रुपये के जेवरात और नकदी साफ कर दी। सोमवार को बैंक अधिकारियों ने जब स्ट्रांग रूम खोलकर देखा तो दंग रह गये अंदर लाकर टूटे थे, जबकि बाहर लॉक लगा था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मुआयना किया तो सुरंग मिली। इसके बाद ही कहानी समझ में आई।

ये है बैंक की स्थिति

सबसे पहले आपको स्थिति समझाते हैं। पुराने बस स्टैंड के पास बैंक की शाखा है। बैंक के बिल्कुल साथ में गली है। इसी गली के दूसरी तरफ वह मकान है, जहां से सुरंग बनानी शुरू की गई थी। इस मकान के पीछे की ओर स्टेडियम और खाली प्लॉट है। इसी तरफ मकान की रसोई भी है।

पांच फीट गहरी है सुरंग
लूट को अंजाम देने के लिए जो सुरंग बनाई गई है वह सुरंग करीब पांच फीट गहरी है और इस सुरंग को इस तरह से बनाया गया है कि एक आदमी ठीक से बैठ सके। इसकी लंबाई करीब बैंक के स्ट्रांग रूम तक सौ से सवा सौ फीट तक है। सुरंग में जांच के लिये पुलिस कर्मियों को भी उतारा गया था।

कमरों में भर दी मिट्टी और मलबा
सुरंग खोदते समय निकलने वाली मिट्टी और मलबा को चोरों ने अपनी कर्मस्थली के एक कमरे में भर दिया था। मिट्टी को प्लास्टिक के कट्टों में भरकर पास वाले कमरे में डाला जाता था। इस समय एक कमरा मलबे से लगभग पूरा भर चुका था। पुलिस को मौके से एक लोहे का कट्टर का ब्लेड, एक जलती हुई टार्च, पांच से छ: प्लास्टिक के कट्टे मिले हैं। इसके अलावा बीड़ी के बंडल और माचिस भी बरामद की गई है।

बंद पड़ा मकान बना पहला निशाना

जिस मकान से सुरंग बनाई गई है, वह मकान शहर के ही महिपाल भनवाला नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। जो कि कई सालों से खाली पड़ा है। मकान के दरवाजे, खिड़कियां लकड़ी की प्लाई और कील ठोककर बंद किए गए थे।

इसके बावजूद चोरों ने इस मकान को पहला निशाना बनाया। मकान की रसोई के रोशनदार से चोरों ने मकान में एंट्री ली और फिर बैंक की तरफ वाले कमरे में पहुंच कर सुरंग बनाई।

क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
इस सबके के बारे में जब डीएसपी राजीव देशवाल से बातचीत की गई तो उन्होंने भी उपरोक्त सवालों के साथ सहमति जताई। डीएसपी राजीव देशवाल ने बताया कि चोर बड़े ही शातिर मालूम होते हैं।

बड़ी ही तन्मयता के साथ प्लानिंग की गई है और प्लानिंग को बड़ी सफाई से अंजाम दिया गया है। राजीव देशवाल ने बताया कि इस मामले में एक नहीं कई एंगल से पुलिस जांच में जुट गई है।

अंदरुनी मिलीभगत हो सकती है वारदात में

बैंक में सेंध लगाकर लॉकर से करोड़ों के जेवरात और नकदी चुराने के मामले में कुछ सवाल ऐसे हैं, जो हर किसी के जेहन में उठ रहे हैं। खासकर पुलिस इन्हीं सवालों को लेकर जांच में जुट गई है।

इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिये पुलिस काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल सीधे तौर पर बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस भी धीमी आवाज में यह ही मान रही है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना नामुमकिन है।

मोटी फर्मों के ही तोड़े लॉकर, क्यों?

बैंक के स्ट्रांग रूम में 360 लाकर है। इनमें से 181 से लेकर 270 तक सीरियल नंबर वाले लाकर को ही निशाना बनाया गया। क्यों? इस क्यों का जवाब और भी जरूरी लगेगा, जब ये पता चलेगा कि ये सभी लाकर शहर की मोटी फर्मों के थे।

शहर के अमीर लोगों में शुमार लोगों की ही पूंजी इन लाकरों में बंद थी। बैंक में और भी 271 लाकर थे, हालांकि वे इतने हाई क्लास लोगों के नहीं थे, लेकिन इसके बारे में चोरों को कैसे पता लगा?

40 लाख रुपये की नकदी छोड़ी, क्यों?

40 लाख रुपये कोई छोटी रकम नहीं होती। बैंक के स्ट्रांग रूम में शनिवार को ही बैंक अधिकारियों ने 40 लाख रुपये रखवाए थे। शनिवार तक सब ठीक था, सोमवार को देखा तो वारदात अंजाम दी जा चुकी थी, लेकिन 40 लाख रुपये वैसे के वैसे ही रखे थे। आखिर इतनी मेहनत के बाद वह 40 लाख रुपये क्यों नही ले गए।

सुरंग की एक्जेक्ट लोकेशन, कैसे?

चलो बंद पड़े मकान में सुरंग बनानी शुरू की। कोई भी शुरू कर सकता है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन सुरंग का मुंह स्ट्रांग रूम में एग्जेक्ट लोकेशन पर कैसे पहुंचाया।

वो भी उस स्थिति में जब स्ट्रांग रूम में कई अलमारियां हैं, लेकिन सुरंग का मुंह एक अलमारी के पास खाली जगह में ही बनाया गया। सुरंग निकालने की इतनी एक्जेक्ट लोकेशन चोरों को कैसे पता लगी?

सुरंग वो भी इतनी सफाई से, कैसे?

चोरों ने किस कदर प्लानिंग कर वारदात को अंजाम दिया, ये सिर्फ सुरंग देखकर ही पता चल जाता है। सुरंग को इतनी सफाई से तैयार किया गया है कि किसी को कोई शक नहीं हुआ।

चोरों ने पहले नक्शा तैयार किया कि इस जगह पर पानी की पाइप है इस जगह पर बैंक की बिल्डिंग के सरिए हैं। स्ट्रांग रूम कहा हैं और कैसे ऊपर की ओर खुदाई करनी है।

सुरंग के रास्ते में बैंक की बिल्डिंग के पिलर भी आए, लेकिन उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इसी तरह सुरंग में पानी की पाइप लाइन, सीवर लाइन को भी नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
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चार छुट्टियां छोड़ रविवार क्यों?

ऐसा तो हो नहीं सकता कि चोर शनिवार रात को मकान में घुसे हों, सुरंग बनानी शुरू की और रविवार तक बैंक के स्ट्रांग रूम में निकल गए हों।

सवा सौ फुट से अधिक लंबी यह सुरंग बनाने में ही एक से डेढ़ माह का समय लग गया होगा। इसके बावजूद चोरों ने कुछ दिन पहले ही पड़ी दीपावली की चार छुट्टियों के बार रविवार का दिन ही चोरी के लिये क्यों चुना।
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