ओलंपियन मिल्खा सिंह के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से विज्ञापन के जरिए पैसे ऐंठने के ढाई साल पुराने मामले में दोनों पक्षों की ओर से समझौते को लेकर अर्जी दाखिल की गई है। अदालत में सीआरपीसी की धारा 320 के तहत ‘कं पाउंडिंग ऑफ ऑफेंस’ (अपराध का समझौता) के तहत अर्जी दायर की गई है।
इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों में समझौता हो चुका है। फिलहाल अदालत अर्जी पर 28 अक्तूबर को सुनवाई करेगी। वहीं अगर समझौते को कोर्ट से मंजूरी मिल जाती है तो एफआईआर रद् हो जाएगी।
मामले के अनुसार मिल्खा सिंह की ओर से उनके वकील तरमिंदर सिंह ने फ रवरी 2014 में पुलिस हेडक्वार्टर में शिकायत देते हुए धोखाधड़ी, जालसाजी जैसी धाराओं में केस दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने इनके खिलाफ 21 अप्रैल, 2014 में आईटी एक्ट समेत सबूत नष्ट करने की आपराधिक धाराओं में केस दर्ज किया था।
इसके बाद तीनों आरोपियों ने सरेंडर कर जमानत ली थी। थाना 3 पुलिस ने नेट गेन्स इंडिया इंटरनेट प्रा.लि. नामक कंपनी से जुड़े आतिर खान, संजीव व सईद अजफर खान के खिलाफ 18 नवंबर, 2014 को चालान पेश किया था।
आरोप मुक्त की दायर की गई थी अर्जी :
मामले में आरोपी पक्ष ने आरोप मुक्त की अर्जी दायर की थी, जिस पर शिकायतकर्ता पक्ष वकील ने कहा था कि मिल्खा सिंह की फर्जी वेबसाइट उनकी फिल्म रिलीज के बाद आरोपी पक्ष ने लाभ कमाने के मकसद से बनाई थी। इसे मिल्खा सिंह की ऑफिशियल वेबसाइट बताया गया। वेबसाइट के पेज पर विज्ञापन लगाकर आरोपी पक्ष कमाई करना चाहता था।