जजनोट कांड मामले में फंसे वकील संजीव बंसल, प्रापर्टी डीलर राजीव गुप्ता और मुंशी प्रकाश राम द्वारा दिए बयान अदालत में माने नहीं जाएं। तीनों ने पुलिस के सामने दबाव में बयान दर्ज करवाए थे।
यह कहना था बचाव पक्ष के वकीलों का। शनिवार को सीबीआई विशेष जज विमल कुमार की अदालत में तत्कालीन सेक्टर 11 थाना प्रभारी रमेश चंद शर्मा के बयान दर्ज हुए। सीबीआई वकील अनुपम गुप्ता ने बताया कि इंस्पेक्टर ने कहा कि 13 अगस्त 2008 को पुलिस कंट्रोल से सूचना मिली थी कि सेक्टर 11 निवासी जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर में एक युवक नगदी लेकर घुस गया है।
बयानों में कहा था गलती से पैकेट पहुंचा था सेक्टर 11 में
थाने से एसआई जोगिंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर 15 लाख की नगदी और मुंशी प्रकाश राम को पुलिस स्टेशन लेकर आए और उनके बयान दर्ज किए। मुंशी प्रकाश राम ने कहा कि उसे 15 लाख रुपये निर्मल सिंह देने के लिए वकील संजीव बंसल ने भेजा था, लेकिन वह गलती से जज के घर पर पहुंच गया।
14 अगस्त को पुलिस ने वकील संजीव बंसल को थाने में तलब कर बयान दर्ज किए। उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपये प्रापर्टी का कमीशन निर्मल सिंह को देना था। उनके दोस्त दिल्ली केरविंद्र सिंह ने प्रॉपर्टी डीलर राजीव गुप्त से निर्मल सिंह के द्वारा पंचकूला सेक्टर 16 में प्लाट खरीदा था। उन्होंने मुंशी को सेक्टर 18 के मकान नंबर 162 में भेजा था। जहां पर निर्मल सिंह को मिलना था। इसके बाद पुलिस ने राजीव गुप्ता और निर्मल सिंह के बयान दर्ज किए।
मामले की अगली सुनवाई दो अगस्त
14 अगस्त को पुलिस ने जस्टिस के पीयन अमरीक सिंह की शिकायत की जांच शुरू की। उसी दिन राजीव गुप्ता और निर्मल सिंह ने प्रापर्टी और अकाउंट से संबंधित सारा रिकार्ड पुलिस के पास जमा करवाया। 16 अगस्त को एसपी मधुर वर्मा ने मामले में लीगल राय लेने के बाद प्रकाश राम, संजीव गुप्ता, निर्मल सिंह और राजीव गुप्ता पर भ्रष्टाचार और साजिश रचने का मामला दर्जकर उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके अलावा इंस्पेक्टर रमेश चंद शर्म ने मुंशी प्रकाश राम से जब्त 15 लाख रुपये की शनिवार को अदालत में शिनाख्त की। बचाव पक्ष के वकील विशाल गर्ग नरवाना ने बताया कि इंस्पेक्टर के चीफ बयान हो चुके हैं।
इंस्पेक्टर मामले में कई तथ्यों को छिपाया गया है। क्रास बयान में सबकुछ सामने आ जाएगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो अगस्त तय की है। अगली सुनवाई पर इंस्पेक्टर रमेश कुमार और एसआई जोगिंद्र कुमार के क्रास बयान दर्ज होंगे।
यह था मामला
दायर मामला 13 अगस्त 2008 का है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील संजीव बंसल ने अपने मुंशी प्रकाश राम को 15 लाख रुपये देकर जस्टिस निर्मल यादव के घर पहुंचाने के लिए कहा था। मुंशी प्रकाश राम गलती से रुपये लेकर जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गया था। जस्टिस निर्मलजीत कौर के नौकर ने मामले की शिकायत पुलिस को दी। सेक्टर 11 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर प्रकाश राम, संजीव बंसल और राजीव गुप्त को दबोचा था।
मामले में जस्टिस निर्मल यादव का नाम सामने आने पर जांच सीबीआई के पास गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच कर निर्मल यादव पर केस चलाने की कानून मंत्री से परमीशन मांगी थी लेकिन उन्हें नहीं मिली थी। 04 मार्च 2011 को सीबीआई ने राष्ट्रपति से निर्मल यादव पर केस चलाने की परमीशन लेकर 25 पेजों की चार्जशीट सीबीआई अदालत में दायर की थी। चार्जशीट दायर होने पर सीबीआई अदालत ने मामले में जस्टिस निर्मल यादव, संजीव बंसल, राजीव गुप्ता , निर्मल सिंह और रविंदर भसीन को कॉपी सप्लाई की थी।