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लुधियाना फर्जी एनकाउंटर में चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 05 Oct 2014 04:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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‘आप’ की पंजाब इकाई के संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर ने बताया कि उनकी पार्टी की चार सदस्यीय टीम ने अपने स्तर पर लुधियाना के जमालपुर की आहलुवालिया कॉलोनी के फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले की जांच की है। जांच में सामने आया है कि दोनों भाइयों का कत्ल, लोकसभा चुनाव में आप का साथ देने के बदले सबक सिखाने के लिए ही किया गया।
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इस टीम में शामिल प्रो. मंजीत सिंह, हरजीत सिंह, विक्रम सिंह और रवनीत ठाकुर ने जांच के दौरान पाया कि हरिंदर व जतिंदर के अपने गांव बोहापुर में राजनीतिक तौर पर स्थापित हो जाने के डर से अकाली नेता घबराए हुए थे। लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों भाई गांव में ‘आप’ के पोलिंग एजेंट थे और यहां से पार्टी प्रत्याशी को 270 वोट की लीड मिली थी।

इसके बाद उनके खिलाफ दो झूठे मामले दर्ज करवाए गए और उनकी मां को कई बार पुलिस थाने बुलाकर प्रताड़ित किया गया। इसके अलावा उनके खिलाफ लड़कियों से छेड़छाड़ का झूठा मामला भी दर्ज करवाया गया और उनके खिलाफ गुंडागर्दी करने का गलत प्रचार भी किया गया।
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इन सारी प्रताड़ना का अंतिम पड़ाव उनके कत्ल के रूप में सामने आया। छोटेपुर ने कहा कि इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ पूरी लड़ाई लड़ी जाएगी।

आप ने सीबीआई जांच की मांग की

आम आदमी पार्टी (आप) ने लुधियाना के जमालपुर की आहलुवालिया कॉलोनी के फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। इसके साथ ही कहा है कि इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल से इस्तीफा दे देना चाहिए।

‘आप’ की पंजाब इकाई के संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर और वरिष्ठ नेता प्रो. मंजीत सिंह ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह फर्जी एनकाउंटर प्रदेश सरकार का असल चेहरा दिखाता है कि किस प्रकार पंजाब में धक्केशाही का राज चल रहा है। पार्टी इसके खिलाफ सभी दलों से एकजुट होने की अपील करती है।

उन्होंने कहा कि फर्जी एनकाउंटर में मारे गए सगे भाइयों हरिंदर सिंह और जतिंदर सिंह की आत्मिक शांति के लिए रखे गए पाठ के भोग (सात अक्तूबर) के बाद इस मामले में पंजाब सरकार के खिलाफ अगला संघर्ष शुरू करेंगे। वे कानूनी और सियासी दोनों तरह की लड़ाई लड़ेंगे। केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक भी पहुंच की जाएगी।

लुधियाना में हुई मुठभेड़

पंजाब के लुधियाना में हुई पुलिस मुठभेड़ में दो युवक मारे गए, जबकि तीन युवक गिरफ्तार हुए हैं। मुठभेड़ सुबह करीब 9 बजे लुधियाना के जमालपुर इलाके की आहलुवालिया कॉलोनी में हुई।

यहां पिछले कुछ दिन से एक महिला ने घर में हॉस्टल खोल रखा था। उसमें 5 युवक रह रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह खाकी वर्दी में खुद को खन्ना पुलिस के अधिकारी कहते हुए कुछ लोग आए।

उन्होंने लोगों को आईडी कार्ड भी दिखाया। पड़ोसियों के कमरे से युवकों के कमरे की ओर गए ही थे कि युवकों के कमरे से फायरिंग शुरू हो गई, जवाब में पुलिस ने फायरिंग की।

दो युवकों की मौत, तीन गिरफ्तार

आमने सामने हुई मुठभेड़ में दो युवकों जतिंदर, हरिंदर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो युवक गिरफ्तार कर लिए गए। एक युवक भाग निकला, जिसे कुछ ही दूरी पर गिरफ्तार कर लिया गया।

खन्ना पुलिस गिरफ्तार युवकों को गिरफ्तार कर चली गई। उधर, लुधियाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है। खबर लिखे जाने तक मामले के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है।

पीजी की मालिक महिला के बारे में भी पता नहीं चल पाया है, कि वह युवकों को जानती थी या नहीं। चर्चा है कि युवक यहां किसी आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने के लिए साजिश बना रहे थे।

क्या कहती है लुधियाना पुलिस?

लुधियाना में हुई पुलिस मुठभेड़ को लेकर कमिश्नर प्रमोद बाण ने बताया कि उन्हें खन्ना पुलिस की इस कार्रवाई के बारे में पहले से कुछ पता नहीं था। मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है।

युवकों की बैकग्राउंड के बारे में पता लगाया जा रहा है। साथ ही खन्ना पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस मुठभेड़ या कुछ और?
मारे गए युवकों के सिर के पीछे से गोली मारी गई है। इसे लेकर पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि मुठभेड़ होती तो गोलियां दोनों ओर से चलती, लेकिन दोनों युवकों के सिर पर पीछे से गोली मारी गई है, इसे लेकर पुलिस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मामले की जांच जारी है।

साख बचाने को बनाई थी कहानी

जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी में दो सगे भाइयों की हत्या मामले में पुलिस ने जो कहानी बनाई, शाम होते होते पुलिस खुद ही उसमें फंस गई। पुलिस ऐसी कहानी बनाना चाहती थी कि किसी तरह पुलिस की साख बच सके।

पहले पुलिस बताती रही कि आरोपियों ने पुलिस पर गोली चलाई तो उसके बाद जवाबी फायरिंग में दोनों युवकों की मौत हो गई। शनिवार दोपहर तक अकाली सरपंच राजविंदर के पति गुरजीत सिंह का नाम तक नहीं था।

देर शाम को पुलिस ने कहानी तैयार की और तीन पुलिस मुलाजिमों के साथ साथ अकाली सरपंच के पति पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया।

आरोपियों से नहीं मिले कोई हथियार

एसीपी लखवीर सिंह टिवाना के अनुसार पुलिस ने घटनास्थल से तीन 32 बोर के पांच खोल, तीन खोल हेड बरामद की हैं। दो गोलियां मृतक युवकों के शवों से बरामद की गई हैं।

पुलिस मुलाजिमों के साथ अंदर गए सरपंच के पति गुरजीत सिंह के पास अपनी लाइसेंसी पिस्तौल थी और पुलिस मुलाजिमों के पास सरकारी हथियार था। आरोपियों के पास से अभी कोई भी हथियार बरामद नहीं हुआ है।

पुलिस मुलाजिमों ने सरकारी हथियार से गोली चलाई गई है या नहीं इसकी जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है कि उन्होंने किस हथियार से गोली चलाई। पुलिस वारदात में इस्तेमाल हथियारों का भी पता लगा रही है।

वहीं आशंका है कि अगर पुलिस मुलाजिमों ने सरकारी हथियार में से गोली नहीं चलाई तो हो सकता है कि मुलाजिमों के पास अपना पर्सनल हथियार भी हो।

गिरफ्तारी पर भी रोक थी

सिविल अस्पताल में जतिंदर और हरिंदर के परिजनों के साथ पोस्टमार्टम कराने पहुंचे गिरफ्तार आरोपी राजवीर के भाई इंद्रपाल ने कहा कि पुलिस ने झूठे मामले में उनके भाई और अन्य युवकों को फंसाया और फर्जी मुठभेड़ दिखा कर दो बेकसूरों की हत्या कर दी। 21 अगस्त को सभी युवकों पर थाना माछीवाड़ा में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ था।

उसके बाद 28 अगस्त को अधिकारियों के सामने पेश होकर जांच की मांग की गई थी। इंद्रपाल ने आरोप लगाया था कि डीएसपी समराला अमृत सिंह इस पूरे मामले की जांच कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई हुई थी। उसके बावजूद पुलिस पांचों युवकों को पेशेवर अपराधी समझ कर गिरफ्तार करने में जुटी हुई थी।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह सब अकाली सरपंच के पति गुरजीत सिंह के साथ मिल कर किया और इस मामले में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराने वाले युवक के परिजन भी शामिल हैं। 
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शिनाख्त के लिए सरपंच की क्या जरूरत थी

इंद्रपाल ने पुलिस जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि अगर पुलिस को युवकों के बारे में पता चल ही गया था कि सब आहलुवालिया कालोनी में रह रहे है तो सरपंच पति गुरजीत सिंह को साथ ले जाने की क्या जरूरत थी।

अगर सरपंच के पास हथियार था तो पुलिस उसे अपने साथ अंदर क्यों लेकर गई। पुलिस उसे बाहर भी खड़ा कर सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरपंच ने अंदर जाकर जानबूझ कर युवकों के साथ मारपीट की और पुलिस के साथ मिल उनकी हत्या कर दी।

पुलिस वालों के पास एके-47 थी
एसएसपी खन्ना हर्ष कुमार बांसल ने कहा कि आरोपी पुलिस मुलाजिमों के पास एक एके-47 थी, लेकिन उससे गोली चली या नहीं इसके बारे में जमालपुर पुलिस जांच कर रही है। अब जांच लुधियाना पुलिस के पास है।

वहीं राजवीर के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से जांच की मांग की थी और इस मामले में आरोपी युवकों की गिरफ्तारी पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई गई थी।
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