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6 नवजातों की मौत, 6 सनसनीखेज खुलासे

Tue, 25 Nov 2014 04:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
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अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत के बाद सेहत विभाग के सचिव विकास गर्ग, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जतिंदर कौर ने सोमवार सुबह जांच शुरू की। हेल्थ डायरेक्टर डॉ. जतिंदर कौर ने कहा कि तीन बच्चे गर्भ में ही मृत (इंट्रा यूट्रिन डेथ) थे। दो बच्चों को बचाया जा सकता था, यहां पर स्टाफ की लापरवाही सामने आई है।
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हेल्थ डायरेक्टर ने कहा कि नर्स और मिड वाइफ डिलीवरी करवा सकती हैं, इसके लिए उनको बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है। हेल्थ डायरेक्टर ने कहा कि मरीज जसविंदर कौर के गर्भ में बच्चे की धड़कन ही बंद थी। जबकि मरीज सर्बजीत कौर का बच्चा काफी कमजोर था और गर्भ के अंदर पानी नहीं था, यह क्रोनिक फिटेल डिस्ट्रेस का मामला था, इसके लिए सिजेरियन करना था, लेकिन परिवार नहीं माना।

मनजीत कौर के गर्भ में पल रहा बच्चा भी एक्सीडेंटल हैमरेज की स्थिति में था। मां को बचाने के लिए सिजेरियन किया गया और बच्चा मरा पैदा हुआ। मरीज रीना रानी के केस में बच्चे ने पैदा होने के बाद सांस नहीं ली।
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परिजनों को बताया गया कि अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है, उसे सीएमसी अस्पताल ले जा सकते हैं, लेकिन परिवार ने सहमति नहीं दी। मरीज वंदना ने दोपहर 1.15 बजे बच्चे ने जन्म लिया और शाम को उसकी मौत हो गई। इस मामले में डॉक्टर की लापरवाही नजर आ रही है।

जल्दबाजी में शुरू किया गया था अस्पताल

सिविल अस्पताल में बनाए गए मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल को दो दिन पहले जल्दबाजी में बिना सुविधाओं के ही शुरू कर दिया गया था।

सरकार की तरफ से अस्पताल की बिल्डिंग तो काफी बड़ी बना दी गई, लेकिन वहां वे सुविधाएं नहीं दी गई, जिनका वादा किया गया था। दो दिन पहले सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने अस्पताल का उद्घाटन किया था।

अब सेहत मंत्री भी मान रहे हैं कि अस्पताल में मशीनरी अभी पूरी नहीं है। अब सेहत मंत्री कह रहे हैं कि बीस दिनों में अस्पताल में सभी सुविधाएं पूरी कर ली जाएंगी।

रविवार को हुए हादसे के बाद अस्पताल में दाखिल मरीज भी काफी घबराए दिखे। अस्पताल में दाखिल मरीज वहां से छुट्टी लेना चाह रहे है, लेकिन सोमवार को सरकारी छुट्टी के कारण ऐसा नहीं हो पाया।

डिलीवरी केस बढ़े तो आनन-फानन में उद्घाटन

मदर एंड चाइल्ड अस्पताल को लगभग डेढ़ साल पहले एक अलग बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद अस्पताल की खाली जगह पर निर्माण का काम शुरू किया गया। साढ़े 17 करोड़ की बिल्डिंग बनकर तैयार भी हो गई।

सरकार की तरफ से चलाई गई स्कीमों के बाद अस्पताल में डिलीवरी केस बढ़ गए। जिस पर नए बने अस्पताल के उद्घाटन की बात होने लगी। अस्पताल के अंदर किसी तरह की कोई मशीनरी और अन्य सुख सुविधाएं अभी आई भी नहीं थी कि अस्पताल के उद्घाटन समय को तय कर दिया गया।

दस बार कहते हैं, तब आती है नर्सः
सुंदर नगर स्थित माधोपुरी में रहने वाले राम कुमार ने कहा कि दो दिन पहले अस्पताल के उद्घाटन की खबर पढ़ने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को यहां दाखिल करा दिया। दाखिल होने के बाद पता चला कि मरीज को चेक करने के लिए पूरा स्टाफ नहीं है।

वह दस बार स्टाफ नर्स के पास जाते हैं तो एक बार नर्स चेकअप के लिए पहुंचती है। रविवार को हुए हादसे के बाद स्टाफ नर्सों का ध्यान उधर ही लगा हुआ है।

स्टाफ पर पैसे लेने के भी आरोप

अस्पताल के अंदर मरीजों ने स्टाफ पर पैसे लेने के आरोप भी लगाए। भगत सिंह नगर की रहने वाली बेबी देवी ने कहा कि उसने कुछ दिन पहले अपनी बेटी को अस्पताल में दाखिल कराया था। उसके घर बेटा हुआ तो स्टाफ नर्स ने पैसे की मांग करनी शुरू कर दी। उसने आरोप लगाया कि सोमवार को छुट्टी होनी थी तो स्टाफ नर्स ने पैसे लेकर ही उन्हें अस्पताल से जाने दिया।

मेडिकल बोर्ड बने
कांग्रेसियों ने इस घटना की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने की मांग की। कांग्रेसियों ने कहा कि जिन परिवारों के बच्चे गए हैं उनको पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। इस पर सेक्रेटरी ने कहा कि वे प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेज देंगे। डाबर ने आरोप लगाया कि स्टाफ की कमी का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

हेल्‍थ सेक्रेटरी बोले, मैं कहां से लाऊं डॉक्टर

सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल अफसर के दफ्तर में कांग्रेसी नेता हेल्थ सेक्रेटरी और डायरेक्टर से मिलकर रोष जताने पहुंचे। इसी दौरान डॉक्टरों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। परेशान हेल्थ सेक्रेटरी बोले कि मैं कहां से लाऊं डाक्टर।

दो दिन पहले भी साक्षात्कार किए थे, केवल तीन ही स्त्री रोग माहिर डॉक्टर आए। आप डॉक्टर ले आओ, मैं उनको तुरंत अपाइंटमेंट लेटर दे दूंगा।

इस पर विधायक सुरिंदर डाबर, जिला प्रधान गुरप्रीत सिंह गोगी ने महिला रोगों के डॉक्टर मुहैया कराने की बात की और हेल्थ सेक्रेटरी से उनका मोबाइल नंबर ले लिया।

लुधियाना सेंट्रल से कांग्रेसी विधायक सुरिंदर डाबर का कहना है कि सिविल अस्पताल में नवजात की मौत के मामले को वह विधानसभा में उठाएंगे। जिम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती।
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राजनीति का अखाड़ा बना सिविल अस्पताल

सिविल अस्पताल में नए बने मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत के मामले में सोमवार को सिविल अस्पताल में खूब राजनीति हुई।

अलग-अलग सियासी पार्टियों के नेता पूरे दिन अस्पताल में जायजा लेने पहुंचते रहे। सुबह से शाम तक कांग्रेस पार्टी ने अपने समर्थकों के साथ सिविल अस्पताल के नए बने यूनिट के बाहर प्रदर्शन किया।

कांग्रेस ने सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी से इस्तीफे और कसूरवार डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। वहीं, आम आदमी पार्टी के वर्करों ने सिविल अस्पताल में पहुंच सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।

उन्होंने एसएमओ से बात कर आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और सर्किट हाउस में पहुंचे सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी की गाड़ी का घेराव करने की कोशिश की।

विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने आरोप लगाया कि अपने नंबर बनाने के चक्कर में सेहत मंत्री ने जल्दबाजी में अस्पताल का बिना सुविधाओं के ही उद्घाटन कर दिया। विधायक डाबर और आशु ने कहा कि कुछ दिनों बाद विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है। इस मामले में सरकार को घेरेंगे और जवाब मांगेगे।
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