प्रेम विवाह के बाद बिना जांच लड़की को नाबालिग बता लड़के को जेल भेजना पुलिस के गले की फांस बन गया है। मंगलवार को कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए माना कि लड़की शादी के वक्त बालिग थी और पुलिस ने गलत जांच की। बिना जांच किए ही युवती के पिता की शिकायत पर ही लड़की को नाबालिग मान युवक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भिजवा दिया।
बेकसूर युवक साढ़े 6 माह जेल में रहा। इसी दौरान परिजनों ने लड़की की कहीं और शादी कर दी। अब फैसला आने के बाद बरी हुआ पीड़ित युवक सामने आया है। उसका कहना है कि पुलिस के कारण उसका घर उजड़ गया और अब पुलिस ही उसे उसकी पत्नी दिलाए। शादी के समय युवती बालिग थी और उसने अपनी मर्जी से शादी की थी।
जल्द ही इस संबंध में एसपी को लिखित पत्र देगा। क्योंकि शादीशुदा युवती बिना तलाक अपनी मर्जी से भी दूसरी जगह शादी नहीं कर सकती। अगर किसी के दबाव में ऐसा किया है तो आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस ने अर्जी पर कार्रवाई नहीं की तो वह कोर्ट में जाएगा।
न्याय न मिला तो अदालत में जाएगा युवक
काहड़ी गांव (जिला झज्जर) निवासी प्रवीण बुधवार को रोहतक पहुंचा। मीडिया के सामने उसने बताया कि वह अपने दोस्त से मिलने हिसार गया, जहां लाखनमाजरा निवासी एक लड़की से मुलाकात हुई।
कुछ समय बाद फोन पर बात हुई और मुलाकात दोस्ती में बदल गई। दोनों ने बिना किसी दबाव के झज्जर जाकर शादी कर ली। प्रवीण के वकील विक्रम ओहल्याण का कहना है कानूनी तौर पर युवक व युवती पति व पत्नी हैं।
पुलिस की गलत जांच से एक युगल का परिवार बसने से पहले उजड़ गया। अब युवक अर्जी देकर न्याय मांगेगा। अगर पुलिस ने न्याय नहीं किया तो दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
कोर्ट ने मामले में ये सुनाया फैसला
फरवरी 2014 में झज्जर का युवक व लाखनमाजरा की युवती घर से चले गए। दोनों ने शादी कर ली। इसे लेकर गांव में पंचायत भी हुई। सुरक्षा मांगने पर लड़के व लड़की को झज्जर पुलिस ने सैफ हाउस भेज दिया, लेकिन वहां से किसी तरह दोनों को रोहतक लाया गया।
यहां लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और वह प्रवीण को ही अपना पति मानती हैं। अब घरवालों के पास नहीं जाएगी। बावजूद इसके लाखनमाजरा पुलिस ने लड़की के परिजनों की शिकायत पर युवक प्रवीण को नाबालिग लड़की के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और लड़की को हरिओम सेवा दल भेजा गया।
बाद में उसे परिजनों के हवाले कर दिया गया। युवक को न्यायिक हिरासत में सुनारिया जेल भेज दिया गया। एक साल तक अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी गई। एडीजे सीमा सिंहल की कोर्ट ने युवक को निर्दोष माना और उसे बरी कर दिया।
पुलिस की गलत जांच के चलते प्रदेश सरकार को हिदायत दी कि युवक को दो लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। साथ में एसपी को हिदायत दी कि जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।