संसद के शीतकालीन सत्र में लाए जा रहे नए हिंदू विवाह अधिनियम का उत्तर भारत की खाप पंचायत विरोध करेंगी। खाप पंचायतों ने इस बिल को रुकवाने के लिए अध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का भी सहारा लिया है। नए बिल की ड्राफ्टिंग की खामियों को भी खाप पंचायतों ने उजागर किया है।
मंगलवार को जींद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्री श्री रविशंकर महाराज को सौंपे ज्ञापन में खाप पंचायतों ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम में गोत्र छोड़कर शादी करने का प्रावधान है, लेकिन विवाह अधिनियम में खापों के प्रभाव को समाप्त करने के लिए नए अधिनियम में कई विषय ऐसे हैं, जिनसे सामाजिक ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा।
खाप पंचायतों ने कहा कि नए अधिनियम से उत्तर भारत की सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ जाएगी। खापों का महत्व 11 अक्टूबर को स्वयं नरेंद्र मोदी ने भी स्वीकारा है। ऐसे में नए अधिनियम को रद कर इस पर दोबारा से काम किया जाना चाहिए।
अधिनियम को लेकर खापों का तर्क
श्री श्री रविशंकर के साथ हुए सम्मेलन में खाप पंचायतों ने तर्क दिया है कि समगोत्र शादियों से पैदा होने वाली संतानें बहुत कमजोर होती हैं। सेवानिवृत्त जनरल डीपी वत्स का कहना है कि उत्तर भारत में कई गोत्र छोड़कर शादी होती हैं। यही कारण है कि यहां के खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ से लेकर ओलंपिक खेलों तक धूम मचाई है।
उन्होंने कहा कि इसका प्रमाण केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम है। जनरल वत्स के अनुसार हर साल इस शहर के लिए 40 करोड़ रुपये की इंसुलीन खरीदी जाती है। इसका कारण नजदीकी रिश्तों में शादियां होना माना गया है। धनखड़ खाप के अध्यक्ष डॉ. ओपी धनखड़ के अनुसार समगोत्र शादियां करने वाले समाज में 250 तरह की बीमारियां पाई जाती हैं।
इसका समाधान ‘क्रॉस ब्रिड’ गोत्र, गांव और पास के गांवों से बाहर शादी करने से बचा जा सकता है। इसके संबंध में डॉ. धनखड़ ने खापों का प्रस्ताव और शोध रिपोर्ट भी श्री श्री रविशंकर महाराज को सौंपी है।
अगले सत्र तक हो स्थगित
नए अधिनियम में कई खामियां हैं, ऐसे में इस बिल का गंभीरता से अध्ययन करने की जरूरत है। इसके अनुसार ही नया बिल तैयार होना चाहिए। पहले समाज में लड़के की सात और लड़की की पांच पीढ़ियों के गोत्र छोड़ने की परंपरा थी, लेकिन अब यह पांच और तीन रह गई हैं। ऐसे में मांग की गई है कि इस बिल को अगले सत्र तक स्थगित किया जाए।
- कुलदीप ढांडा, संयोजक, सर्वखाप हरियाणा
उत्तर भारत की पहचान का खतरा
हर क्षेत्र की अपनी पहचान और सामाजिक नियम हैं। इनको बचाने के लिए हर समाज और सरकार को प्रयास करने चाहिए। नए विवाह अधिनियम में उत्तर भारत की परंपराएं खतरे में पड़ रही हैं, ऐसे में इसका विरोध किया जा रहा है। उम्मीद है कि श्री श्री रविशंकर के प्रयासों से यह बिल बदला जाएगा।
- डीपी वत्स, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल, पूर्व चेयरमैन एचपीएससी