बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सोमवार को दो आरोपियों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में पेश किया गया। इस दौरान दोनों आरोपियों ने रामकुमार चौधरी की तरह ही अधिकतर सवालों के जवाब में खुद को निर्दोष बताते हुए सबूतों को ही गलत करार दिया।
दोनों से करीब 170 सवाल किए गए, जिनमें 150 से अधिक सवालों के जवाब में आरोपियों ने सबूतों को गलत बताया और आरोपी विधायक रामकुमार चौधरी का बचाव करते रहे।
धर्मपाल ने 85 सवालों के जवाब में खुद को निर्दोष बताते हुए साक्ष्यों को गलत ठहराया, जबकि दूसरे आरोपी गुरमीत ने भी 85 सवालों के जवाब में खुद को निर्दोष बताया।
ज्योति के पोस्टमार्टम के दौरान मिले बाल के सैंपल, चंडीगढ़ के जिस मकान में ज्योति रहती थी, वहां से जाने के बाद नहीं लौटने के बारे में पूछे गए तमाम सवालों के जवाब में भी गुरमीत ने इस प्रकरण से खुद को अनजान बताया।
रामकुमार ने भी खुद को बताया था निर्दोष
कुल मिलाकर ज्योति हत्याकांड के 12 आरोपियों में से तीन के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि नौ के बयान अब भी बाकी हैं। अब इस मामले में अगले बयान 11 जुलाई को दर्ज होंगे।
पहले अपने बयान दर्ज करा चुके हिमाचल के दून के विधायक रामकुमार चौधरी ने भी ज्योति से किसी तरह के रिश्ते से इनकार करते हुए इस मामले को राजनीतिक साजिश का नाम दिया था। रामकुमार ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए मोबाइल टावरों की लोकेशन के आधार पर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा था कि एक फोन का इस्तेमाल ड्राइवर करता था और जिस दिन ज्योति की हत्या हुई थी उस दिन वह बद्दी स्थित अपने गांव में थे।
मोबाइल लोकेशन को इस जांच में काफी अहम माना जा रहा है, लेकिन लोकेशन का ब्योरा देते हुए जब आरोपियों से इस मामले से जुड़े होने की बात कही गई तो उन्होंने साफ तौर पर इनकार कर दिया।
यह था ज्योति की हत्या का मामला
21-22 नवंबर 2012 में ज्योति की हत्या के बाद उसका शव सेक्टर-21 में फेंक दिया गया था। बूटी राम की शिकायत पर 22 नवंबर 2012 को सेक्टर-पांच थाने में विधायक सहित 12 लोगों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आठ जनवरी 2013 को विधायक रामकुमार ने कोर्ट में सरेंडर किया था। बूटी राम के वकील जितेन्द्र सहरावत ने बताया कि चूंकि विधायक से जुड़ा यह मामला है। उनके राजनीतिक प्रभाव में आकर कुछ लोगों ने शिकायतकर्ता को धमकियां दी हैं, जिनके खिलाफ शिकायत दी गई।