बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में पुलिस को तगड़ा झटका लगा है।
जिस प्राइवेट अस्पताल में ज्योति का गर्भपात हुआ था, वहां की डाक्टर ने शुक्रवार को कोर्ट में मुख्य आरोपी विधायक रामकुमार चौधरी को पहचानने से इनकार कर दिया।
वहीं, पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक चौधरी भी ज्योति के साथ गए थे।
डा. अदिति ने सुनवाई के दौरान कहा कि कोर्ट में जो व्यक्ति बैठा है, उन्होंने उसे टीवी पर देखा है।
गर्भपात कराने आए व्यक्ति को वह ठीक से नहीं पहचानती। गर्भपात कराने की मंजूरी के फार्म पर गारंटर के जो ओवरराइट साइन हैं, वह उन्होंने खुद ही किए थे।
डा. अदिति कोर्ट में अपने बयान से पलट गईं। उन्होंने कहा कि पहले फार्म पर राम कुमार नाम के व्यक्ति के साइन थे। कुछ देर बाद ही उनके पास एक व्यक्ति ने आकर कहा कि राम कुमार उसका पक्का नाम नहीं है।
असली नाम राकेश कुमार शर्मा है। दोबारा साइन करने के लिए उस व्यक्ति को फार्म दिया गया और उसने फार्म पर एक जगह राकेश कुमार लिखकर चला गया। इसलिए दूसरे फार्म पर उन्होंने खुद ही राकेश कुमार शर्मा लिख दिया।
पोस्टमार्टम बोर्ड की डाक्टर भी नहीं दे पाईं ठीक से जवाब
ज्योति का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के बोर्ड की सदस्य डॉ. ममता भी ठीक से गवाही नहीं दे पाई। इसके अलावा बोर्ड के दो अन्य गवाहों को गिवन-अप कर दिया गया।
डॉ. ममता ने कोर्ट में कहा कि उन्हें नहीं पता कि ज्योति के शरीर पर टायर कहां से गुजरा, जबकि बोर्ड ने पहले ओपिनियन दिया था कि ज्योति का गला दबाया गया और उसके बाद सिर के ऊपर से भारी वाहन निकाला गया।
ज्योति के पिता और बहन नहीं पहुंचे कोर्ट
शुक्रवार को ज्योति के पिता बूटी राम व बहन की भी गवाही होनी थी, लेकिन बूटी राम ने बीमार होने की अर्जी डाल दी, जिसमें मेडिकल भी लगा था।
साथ ही यह भी कहा गया कि जब बूटी राम नहीं आ सकते तो छोटी बेटी का भी आना संभव नहीं है। कोर्ट ने इस अर्जी को मंजूर कर दिया।
विधायक के हस्ताक्षर का हो चुका है मिलान
भले ही डॉक्टर कोर्ट में होस्टाइल हो गई हों, लेकिन पुलिस के लिए राहत की बात यह है कि ओवरराइटिंग से पहले के साइन राम कुमार चौधरी के ही हैं।
इनका मिलान लैब में हो चुका है और पिछली सुनवाई पर कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी। दरअसल, गर्भपात की मंजूरी के फार्म पर पहले साइन हुए उसमें राम कुमार लिखा है।
उसके बाद उन पर ओवरराइटिंग हुई, जिसमें राकेश कुमार और दूसरी जगह राकेश कुमार शर्मा लिखा है।