Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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पेरीफेरी के गांवों की शामलात जमीनों की रसूखदारों के नाम अवैध रजिस्ट्रियां और अवैध कब्जों के मामले में दोषियों पर एफआईआर की तलवार लटक गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए ईमानदार अधिकारियों की सूची मांगी है। सेवानिवृत्त जस्टिस कुलदीप सिंह ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट पर कार्रवाई की जिम्मेदारी इन अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इन अधिकारियों को कलेक्टर और कमिश्नर के रूप में कार्रवाई का अधिकार दिया जाएगा। इस दौरान कोर्ट मित्र ने अपने सुझाव में कहा कि दोषियों की सूची लेकर इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में फिलहाल 12 दिसंबर को सुनवाई तय की है।
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान एसआईटी ने अपनी सीलबंद रिपोर्ट पेश की। इस दौरान कोर्ट मित्र ने पंजाब सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभी तक पंजाब सरकार कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति ही कर रही है। इसलिए इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई के लिए मैकेनिज्म तैयार किया जाए ताकि और लोगों के बीच भी कड़ा संदेश जाए। इस पर हाईकोर्ट ने कोर्ट मित्र व पंजाब सरकार की वकील रीटा कोहली को जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि वे ही ईमानदार अधिकारियों के पैनल के सदस्यों को नामित करें।
मामले में रसूखदार लोगों के नाम हैं, इसलिए पैनल ऐसा हो, जिसे मैनेज न किया जा सके। इस पर दोनों की ओर से कहा गया कि वे केवल नामों की सूची सौंपेंगे ताकि कोर्ट उनमें से चुनाव कर सके। इस दौरान पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक ने बताया कि अवैध तरीके से जमीनों पर कब्जे के 1919 केस मोहाली के कलेक्टर कम जिला पंचायत और विकास अधिकारी, कलेक्टर कम एडिशनल डिप्टी कमिश्नर और कमिश्नर-कम-जॉइंट डेवलपमेंट कमिश्नर की अदालत में लंबित हैं। इनमें से अधिकतर केस खरड़ ब्लॉक से है।