चंडीगढ़ के पूर्व चीफ इंजीनियर के के जैरथ को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी चंडीगढ़ प्रशासन के उन निर्देशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत उन्हें डिसमिस कर दिया था।
1998 में एक भ्रष्टाचार के मामले के तहत बिजनेस ब्यूरो ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। चंडीगढ़ प्रशासन ने भ्रष्टाचार के मामले के तहत उन्हें सेवाओं से बर्खास्त कर दिया था। पूर्व इंजीनियर को इस मामले में 15 साल बाद न्याय मिला है।
गौरतलब है कि 23 सितंबर 1998 में विजिलेंस ने पूर्व चीफ इंजीनियर केके जैरथ, एक्सईएन एएस ढींगरा, कॉन्ट्रेक्टर तरसेम लाल के खिलाफ जीएमसीएच-32 के सी और डी ब्लॉक की बिल्डिंग के निर्माण में इस्तेमाल स्टील और आरसीसी में तय रेट से ज्यादा पर टेंडर देने का आरोप लगाया था।
विजिलेंस ने इनके खिलाफ इस निर्माण कार्य में 62 लाख रुपये का नुकसान करने का आरोप लगाया था। 24 फरवरी 1999 में इस केस में शुरू हुआ था, जिसमें चार अन्य आरोपियों को शामिल किया गया था, इनमें सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर एससी कत्याल, एक्सईएन एसएस भट्टी, अमरजीत सिंह ढींगरा, तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट नंदराम और हेड ड्राफ्ट्समैन कंस राज सैनी को भी आरोपी बनाया था। इन पर भी गलत टेंडर अलाट करने का आरोप था।
के के जैरथ पर कुल छह मामलों में आरोप तय हुए थे। बीते शुक्रवार को वे छठे मामले में बरी हुए थे। पांच मामलों में वे पहले ही बरी हो चुके थे।