दस साल पुराने हैरी वर्मा के अपहरण और हत्याकांड के दो दोषियों की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट की ट्रिपल बेंच ने शुक्रवार को मुहर लगा दी। जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने मामले में सजायाफ्ता दोषियों विक्रम सिंह और जसवीर सिंह की अपील को ठुकराते हुए उनकी मौत की सजा को बरकरार रखा है।
विक्रम और जसवीर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में तीसरी बार याचिका दायक की गई थी। इससे पहले होशियारपुर सेशन कोर्ट ने 21 दिसंबर 2006 को आरोपी विक्रम सिंह, जसवीर सिंह और उसकी पत्नी सोनिया को मौत की सजा सुनाई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 30 मई 2008 को सजा की पुष्टि कर दी थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
अदालत ने 25 जनवरी 2010 को सोनिया की सजा को आजीवन कैद में तब्दील कर दिया था जबकि बाकी दोनों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी। इसके बाद दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर उनके खिलाफ धारा 364ए के तहत सुनाई गई मौत की सजा को गैर संवैधानिक करार देते हुए इसे चुनौती दी थी।
यह अपील 2 मई 2012 को वापस लिए जाने के कारण खारिज कर दी गई थी। इसके बाद 2013 में दोषियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन के तहत एक अन्य अपील (आपराधिक) दायर की गई। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस ज्योति मुखोपाध्याय की बेंच ने दो जुलाई 2013 को मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ट्रिपल बेंच में सुने जाने का आदेश दिया।
ट्रिपल बेंच के पास सुनवाई के दौरान दोषियों ने निचली अदालत और उसके बाद के हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को इस आधार पर चुनौती दी थी कि धारा 364ए वहीं लगाई जा सकती है, जहां अपराध सरकार के खिलाफ प्रतिबद्ध हो या जहां अपराध किसी भी विदेशी राज्य या अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन के खिलाफ हो।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले की गंभीरता के हिसाब से उक्त धारा को अपहरण संबंधी मामलों की बढ़ती गिनती को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि दोषियों को न केवल धारा 364ए बल्कि हत्या के लिए धारा 302 के तहत भी दोषी ठहराया गया है।
इस मामले में यह सजा दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों के मानकों पर भी पूरी तरह खरी उतरती है। इसके बाद बेंच ने मामले में दी गई सजा को न्यायोचित करार देते हुए याचिका बर्खास्त कर दी।
हैरी के पिता ने किया स्वागत
हैरी के पिता रवि वर्मा ने फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि आरोपियों को यूं बार-बार अपील का मौका देने के बजाय पहली अपील रद्द होते ही फांसी देनी चाहिए ताकि यह नजीर बन सके।
क्या था मामला
14 फरवरी 2005 को जौहरी रवि वर्मा के नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे हैरी वर्मा उर्फ अभि का सुबह स्कूल जाते समय अपहरण कर लिया गया था। बाद में अपहरणकर्ताओं ने फोन पर फिरौती मांगी थी। कॉल से हुई आवाज की पहचान के बाद जब पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर एक घर पर दबिश दी तो वहां से अभि के जले हुए कपड़े और स्कूल बैग मिला था।
पुलिस ने इस मामले में रवि वर्मा के दोस्त विक्रम सिंह, उसके साथी जसवीर और अभि की अध्यापिका रह चुकी जसवीर की पत्नी को गिरफ्तार किया था। आरोपियों की निशानदेही पर अभि का शव अगली सुबह आदमपुर के पास खेतों के किनारे से बरामद किया गया था।