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गुरदासपुर आतंकी हमले में ढेर आतंकियों को लेकर 6 बड़े खुलासे

Wed, 29 Jul 2015 06:39 PM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, दीनानगर(गुरदासपुर)
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पंजाब को दहलाने के इरादों के साथ आए तीनों आतंकी आपस में माझा की पंजाबी में बातचीत कर रहे थे। यह खुलासा किया है आतंकियों की गोली से घायल हुए होमगार्ड जवान राजिंद्र कुमार ने।
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गुरुनानक देव अस्पताल में दाखिल होमगार्ड जवान ने हमले की पूरी दास्तां बया की। होमगार्ड जवान ने बताया सुबह साढ़े पांच बजे तीन आतंकवादी एक मारुति कार से बाहर निकलते हैं।

तीनों ने सेना की वर्दी पहन थी और मुंह कपड़े से ढके थे। जब थाने की पोस्ट पर जब उसने पूछा तो को तीनों ने उसे गोलियां मार दी। इसके बाद भी वह थाने का मेन गेट बंद कर देता है और बेहोश होकर गिर पड़ता है। होमगार्ड जवान ने बताया इससे पूर्व उसने आतंकवाद का दौर भी देखा था।
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सोमवार को आतंकियों ने जब अंधाधुंध फायरिंग की तो ऐसे लग रहा था जैसे लड़ाई का माहौल बन गया हो। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

घायल होमगार्ड जवान राजिंद्र ने बताया आतंकवादी आपस में माजा की पंजाबी में बातचीत कर रहे थे। जब उनसे पूछा तो उस पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। तीन गोलियां लगने से वह अधिक समय तक उनका मुकाबला नहीं कर सका। बाद में सुरक्षा बलों की सहायता से अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल दाखिल कराया गया।

तबाही का सामान साथ लेकर आए थे आतंकी

सेना की वर्दी पहनकर आए आतंकियों के शव को मंगलवार को थाने की इमारत से निकाला गया। शवों को गुरदासपुर के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवा दिया गया है।

छानबीन के दौरान बम निरोधक दस्ते को इमारत में से 10 ग्रेनेड मिले, जो कभी भी फट सकते थे। ग्रेनेड शवों के आस-पास बिखरे पड़े थे, जिस कारण टीमें अंदर नहीं जा पा रही थी। दोपहर तक गर्मी के कारण आतंकवादियों के शव से बदबू उठने लगी थी और उनकी बॉडी डिकंपोज होने लगी थी।

इस पर एसएसपी गुरप्रीत तूर ने ग्रेनेड डिफ्यूज करने के आदेश जारी किए। इसके बाद ज्यादा घातक ग्रेनेड को चिन्हित किया गया और शव बाहर निकाले गए। एक बम को डिफ्यूज कर दिया गया था।

एसएसपी गुरप्रीत तूर के मुताबिक नौ बम अभी बाकी हैं। जिनको बम निरोधक दस्ता डिफ्यूज करेगा। आतंकियों के कमरे से एक राकेट लांचर भी मिला है, इसके अलावा कारतूस और जीपीएस सिस्टम के अलावा आर्मी के बैग मिले हैं। इन्हीं बैगों में आतंकी गोलियां भरकर लाए थे।

जीपीएस सिस्टम साथ लाए थे आतंकी

छानबीन के दौरान पुलिस को आतंकियों के पास से जीपीएस सिस्टम मिला है। सिस्टम को जांच के लिए दिल्ली भेज दिया गया है। इससे आतंकवादियों के भारत में घुसने का पूरा रूट पता चलने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक तीनों आतंकवादियों की उम्र 23-25 के आसपास बताई जा रही है। दीनानगर थाने में सोमवार की घटना के संदर्भ में मामला दर्ज कर लिया गया है।

मंगलवार को जम्मू के डीआईजी अशरफ वाणी, पंजाब के डीजीपी सुमेध सैनी, जम्मू पुलिस के डीएसपी बार्डर दिवाकर सिंह, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, नई दिल्ली से आए आईबी के अधिकारियों के अलावा सिख राइफल सेना के अधिकारियों ने दीनानगर थाने का दौरा किया और मामले की जानकारी ली।

आतंकियों ने ही रेलवे ट्रैक पर बम लगाए थे

एसएसपी गुरप्रीत तूर के मुताबिक, आतंकी बामियाल से घुसे थे और उन्होंने ही ट्रैक पर बम फिट किए और थाने पर हमला किया। यह जांच का विषय है।

डीजीपी सैनी के मुताबिक आतंकियों के जीपीएस, एके-47 और गोली सिक्कों पर स्क्रैच मिले हैं, ताकि पता न लग सके कि ये कहां के निर्मित है। आतंकियों के कपड़ों से टैग भी हटाए गए थे।

डीजीपी ने कहा कि आईबी से उन्हें कोई इनपुट नहीं मिला था। उन्होंने कहा कि आतंकी खाने के पैकेट भी नहीं लाए थे ताकि उनकी लोकेशन का पता न चल सके।

पटरी में लगे हर बम में था डेढ़ किलो आरडीएक्स

रेलवे पुल पर ‌मिले पांच बम आरडीएक्स से भरे हुए थे। देसी ढंग से तैयार हर बम में 1.5 किलो आरडीएक्स था। रेलवे पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि बम सुबह तीन से चार बजे के बीच फिट किए गए थे। इसके बाद ट्रैक से दो ट्रेनें भी गुजरीं।

वहीं बम को जब निकाला गया तो पता चला कि एक बम की बैटरी पानी में गिरने से खराब हो गई थी, जिस कारण सर्किट पूरा नहीं हो पाया और बम नहीं फटे। सुबह चार बजकर दस मिनट पर चक्की बैंक से चलकर बटाला जाने वाली मालगाड़ी इस ट्रैक से गुजरी। इसमें पिग आयरन भरा हुआ था। उसके बाद सुबह 4.52 पर पठानकोट से अमृतसर जाने वाली डीएमयू निकली। इसके कुछ समय बाद ही सतपाल ने बम को देख लिया था।

वहीं राजकीय रेलवे पुलिस के एएआईजी लखविंदर खैहरा के मुताबिक तीसरी डीएमयू को समय रहते ही रोक लिया गया था। तीन बजे से पहले ही रेलवे की गश्त टुकड़ी पटरी पर से निकली थी। इसलिए आशंका है कि यह काम तीन से चार बजे के बीच किया गया है। आसपास गुर्जरों के डेरे हैं, जिनका पूरा ब्यौरा लिया जा रहा है।

एआईजी खैरा ने कहा कि कई बार आईबी ने इनपुट दिए कि अटारी रेलवे स्टेशन और पठानकोट ट्रैक पर खतरा है। रेलवे अधिकारियों को कई पत्र लिखे कि तारों को लगाने का काम पूरा किया जाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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पाकिस्तान से आए थे, बामियाल से घुसे थे

प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे। उन्होंने दीनानगर में दाखिल होने के लिए जीपीएस सिस्टम का इस्तेमाल किया था। भारतीय सीमा में दाखिल होने के लिए आतंकियों ने शक्करगढ़-बामियाल का रास्ता चुना।

डीजीपी सुमेध सिंह सैनी ने भी कहा कि आतंकियों के जीपीएस की पहली लोकेशन रावी नदी के किनारे बामियाल की मिली है। डीजीपी मंगलवार को दीनानगर थाने का दौरा करने पहुंचे थे। पाकिस्तान के सियालकोट से कुछ ही दूरी पर स्थित गांव शक्करगढ़ भारतीय सीमा से सटा हुआ है। यह गांव दीनानगर से सिर्फ 20 किलोमीटर के फासले पर है।

दीनानगर और शक्करगढ़ के रास्ते में गांव बामियाल और पहाड़ीपुर एरिया आते हैं। आतंकवादियों के पास कोई वाहन नहीं था, इसलिए ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आतंकी भारतीय सीमा में दाखिल होकर पैदल ही दीनानगर रेलवे पटरी से गांव तलवंडी पहुंचे, जहां उन्होंने पुल पर बम फिट किया। इसके बाद एक किलोमीटर पैदल चलकर शहरी क्षेत्र में घुसे।
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