उधार दिए हुए 20 लाख रुपये नहीं मिले तो एसडीएम कार्यालय के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ने ऑफिस में फंदा लगाया। मामला हरियाणा के झज्जर का है। बेरी एसडीएम कार्यालय में उपाधीक्षक शमशेर सिंह, निवासी दुल्हेड़ा ने बुधवार की रात लघु सचिवालय में डीसी कांफ्रेस रूम के पास बने चौकीदार के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
सुबह शव लटकता देख लघु सचिवालय में हड़कंप मच गया। डीएसपी धीरज कुमार व अन्य पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर छानबीन की तो उसकी जेब से सुसाइड नोट मिला। इसमें एक ठेकेदार, उसके भाई व दो अन्य पर उसके 20 लाख रुपये न लौटाने से परेशान होकर आत्महत्या करने की बात लिखी है।
पुलिस ने चारों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के बाद वारिसों को सौंप दिया गया है। गांव दुल्हेड़ा निवासी शमशेर सिंह (46) वर्तमान में बेरी एसडीएम कार्यालय में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत था।
बुधवार की रात को ढाई बजे के करीब वह लघु सचिवालय पहुंचा और वहां तैनात चौकीदार से सिर में दर्द होने की बात कहते हुए उसके कमरे में आराम करने लगा। चौकीदार का कमरा डीसी कांफ्रेंस हॉल के साथ है। इस दौरान शमशेर ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
चौकीदार बाद में अपने अन्य साथियों के साथ ड्यूटी देने लगा। सुबह वह लौटा तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिला। पीछे की खिड़की से झांक कर देखा तो शमशेर फंदे पर लटक रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। खिड़की के शीशे तोड़कर पुलिस अंदर घुसी और कमरे का दरवाजा खोला। मृतक की जेब से तलाशी में एक पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ।
पैसों के लेन देन विवाद से परेशान था
झज्जर पुलिस चौकी प्रभारी मुनेश ने बताया कि शमशेर ने पैसों के लेन देन के विवाद से परेशान होकर आत्महत्या करने की बात सुसाइड नोट में लिखी है। लिखा है कि गामटान के बालकिशन, ईशरहेड़ी के जयपाल, बादली के ठेकेदार वेदप्रकाश और इसके भाई नाहर सिंह ने शमशेर से 20 लाख रुपये उधार लिए थे।
बार-बार मांगने के बावजूद वे उसकी जिंदगी भर की जमापूंजी लौटा नहीं रहे थे। पुलिस ने चारों के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के बाद वारिसों को सौंप दिया गया है।