रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) की फीस में 26.5 लाख रुपये के गबन के मामले में पुलिस ने चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार कर्मचारियों में फूड एंड सप्लाई विभाग के अकाउंटेंट दीप सिंह, गवर्नमेंट प्रेस के भूपिंदर सिंह, अकाउंटेट गुरविंदर सिंह और डीसी ऑफिस के रिटायर्ड अकाउंटेंट देव राम शर्मा शामिल हैं। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने चारों आरोपियों को जिला अदालत में पेश किया।
अदालत ने सभी को 21 नवंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। आरोपी भूपिंदर सिंह, गुरविंदर सिंह और दीप सिंह तीन साल बाद रिटायर होने वाले हैं जबकि देवराम शर्मा कुछ महीने पहले ही रिटायर हुए थे। पुलिस मामले में शामिल छह अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस ने 9 नवंबर 2011 को आईसीआर एंड एलए विभाग के उपायुक्त संजीव कोहली की शिकायत पर चारों के अलावा डीईओ कार्यालय के दीपक कुमार, अनीता, मनदीप कौर, नीरु, अशोक कुमार, विनोद कुमार और दीपू सिंगला के खिलाफ धारा 409 और 420 के तहत केस दर्ज किया था।
ऐसे हुआ था घोटाला
आरएलए के अकाउंट्स विभाग का 1 अप्रैल 2010 से 31 अक्तूबर 2011 तक स्पेशल ऑडिट हुआ था। इस दौरान यह सामने आया कि इस अवधि में वाहन रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में वसूले गए 26.5 लाख रुपये कर्मचारियों ने ट्रेजरी में जमा ही नहीं कराए।
आरएलए में 26.5 लाख रुपये के घोटाला सामने आने से पहले 5.6 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। डेढ़ साल में आरएलए के कर्मचारियों ने कुल 31 लाख रुपये का घोटाला कर दिया था। घोटाले की जांच चंडीगढ़ के तत्कालीन एडीसी एमएल शर्मा ने की थी।
जांच में सामने आया था कि अप्रैल से अगस्त तक आरएलए के कर्मचारियों ने 5.6 लाख रुपये ट्रेजरी में जमा नहीं कराए थे। यह पैसे डीएल और आरसी की फीस के तौर पर लोगों से लिए गए थे। इस मामले में 10 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था।