गांव बलौंगी में वीरवार रात बाइक सवार तीन युवकों ने बिजनेसमैन को घर के बाहर कर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस हमले में बिजनेसमैन हरविंदर सिंह उर्फ हीरा (32) गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके पैर और बाजुओं में गोलियां लगी है। गंभीर हालत में घर वाले उन्हें पहले सिविल अस्पताल मोहाली ले गए, लेकिन अस्पताल वालों ने कहा कि मामला उनके एरिया का नहीं है। उन्होंने उसे खरड़ रेफर कर दिया। जहां हालत गंभीर होने के कारण हरविंदर को पीजीआई रेफर कर दिया गया।
वारदात की सूचना मिलते ही मौके पर बलौंगी थाने के एसएचओ अमरदीप सिंह पहुंचे और घटना स्थल का जायजा लिया। घटना स्थल से गोली का एक खोल बरामद हुआ है। एसएचओ ने बताया कि उन्हें मामला आपसी रंजिश का लग रहा है। पीड़ित के बयान दर्ज करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जानकारी के मुताबिक, यह घटना बलौंगी स्थित गुरुद्वारा के सामने तीन नंबर घर की है। पीड़ित के पिता गुरदीप सिंह ने बताया कि उनका बेटा बिजनेसमैन है।
वह खाने पीने व अन्य ग्रॉसरी आइटम सप्लाई करता है। वारदात वीरवार रात करीब सवा आठ बजे की है। तीन लोग स्पलेंडर बाइक पर आए। उन्होंने घर का दरवाजा खटखटाकर हरविंदर को बाहर बुलाया। हरविंदर जब अपने छह साल के बेटे के साथ बाहर गया तो उन्होंने उस पर फायरिंग कर दी। इस दौरान दो गोलियां हरविंदर की टांगों और एक बाजू में लगी। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग वहां पर इकट्ठा हो गए। इस दौरान आरोपी मौका पाकर वहां से फरार हो गए।
उन्होंने बताया कि आरोपी स्पलेंडर बाइक पर आए थे। इसके बाद वह हरविंदर को लेकर सिविल अस्पताल मोहाली गए, लेकिन अस्पताल वालों ने कहा कि यह केस उनके एरिया का नहीं है। इसके बाद उन्हें अपने बेटे को खरड़ ले जाना पड़ा, लेकिन हालत गंभीर होने व खून ज्यादा बह जाने के कारण उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। इस हालत में उन्हें करीब छह किलोमीटर तक घायल बेटे को घुमाना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। साथ ही आरोपियों को पकड़ा जाना चाहिए।
बाल बाल बचा मासूम, अंदर जाकर छुपा
हमले में एक छह साल का मासूम बच्चा बाल बाल बच गया। घटना के बाद से वह दहशत में है। वहीं रोते हुए वह घर के कोने में जाकर छिप गया। घरवालों का कहना है कि बच्चा काफी डरा हुआ है। वह किसी को कुछ नहीं बता पा रहा है।
महिलाओं ने हमलावरों को देखा
पता चला है कि जब आरोपियों ने गोलियां चलाईं, उस समय वहां से कुछ महिलाएं गुजर रही थीं। उन्होंने हमलावरों को देखा है, लेकिन गोली चलने से वह डर गई थी। वह बाइक का नंबर नोट नहीं कर पाईं।