जजनोट कांड मामले में सीबीआई जज विमल कुमार की अदालत में शनिवार को हुई तीनों गवाहियां मामले के मुख्य आरोपियों के खिलाफ गईं।
इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस निर्मल यादव सहित पांच आरोपी हैं।
शिकायतकर्ता की गवाही
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तत्कालीन जस्टिस निर्मलजीत कौर के चपरासी और मामले के शिकायतकर्ता अमरीक सिंह ने शनिवार को बयान दर्ज कराए। अमरीक सिंह ने मुंशी प्रकाश राम को भी पहचान लिया। अमरीक ने कहा कि 13 अगस्त 2008 को मुंशी प्रकाश राम ही जस्टिस निर्मलजीत कौर की सेक्टर-11 स्थित कोठी पर पैकेट लेकर आया था। उसने कहा था कि दिल्ली से आए कागजात जस्टिस को देने हैं।
वह प्रकाश राम से पैकेट लेकर अंदर डाइनिंग रूम में गया। जस्टिस निर्मलजीत कौर ने पैकेट खोलने के लिए कहा तो उसके अंदर नगदी थी। तब जस्टिस ने प्रकाश राम को पकड़ने के लिए कहा और खुद पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। उन्होंने प्रकाश राम को पकड़ लिया। सूचना मिलते ही पीसीआर और सेक्टर-11 थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। अमरीक सिंह ने सेक्टर-11 थाने में शिकायत दर्ज कराई।
दोनों मुंशियों की गवाही
सेक्टर-11 थाने में तत्काली मुंशी बहादुर सिंह और सत्यवीर ने सात डीडीआर दर्ज की थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने ही इन्हें दर्ज किया था। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि सत्यबीर को पंजाबी लिखनी नहीं आती तो पंजाबी में डीडीआर कैसे लिखी गई है।
निर्मल यादव को छूट का लाभ, बाकी हुए पेश
शनिवार को सुनवाई के दौरान मामले में आरोपी वकील संजीव बंसल, प्रापर्टी डीलर राजीव गुप्ता, होटलीयर रविंदर भसीन और निर्मल सिंह पेश हुए। पूर्व जस्टिस निर्मल यादव को पेशी से छूट मिली है। मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को तय की है।
क्या था मामला
सीबीआई में दर्ज मामले के अनुसार 13 अगस्त 2008 मुंशी प्रकाश राम गलती से 15 लाख रुपये लेकर जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गया था। ये रुपये जस्टिस निर्मल यादव के लिए भेजे गए थे। बाद में जांच में सामने आया था कि ये रुपये वकील संजीव बंसल ने होटलीयर रविंदर भसीन की ओर से भिजवाये थे।
कोट
आज जो तीनों गवाहियां हुई हैं, उससे सीबीआई का पक्ष मजबूत हुआ है। तीनों गवाह अपने बयान पर कायम रहे हैं।
-अनुपम गुप्ता, सीबीआई के वकील