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'लिव इन रिलेशन में बच्चा हो जाए तो भी रेप नहीं'

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रेप के केस में जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है कि अगर बालिग जोड़ा लिवइन रिलेशन में रह रहा है तो बच्चा हो जाए तो उसे रेप केस नहीं माना जाएगा। इस आधार पर महिला के आरोपों को खारिज करते हुए कोर्ट ने आरोपी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने आरोपी को न केवल निर्दोष करार दिया बल्कि शिकायतकर्ता महिला को स्पष्ट कहा कि बिना उसकी सहमति के तीन साल तक शारीरिक संबंध स्थापित नहीं किए जा सकते। अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।

मामले के अनुसार 27 सितंबर 2014 को फतेहाबाद निवासी एक महिला ने गांव झलनियां निवासी युवक पर दुराचार का मामला दर्ज करवाया था। महिला के अनुसार तीन वर्ष पूर्व युवक उसके पति को काम दिलवाने के लिए गांव झलनियां ले गया और वहीं पर रहने के लिए ढाणी में कमरा दे दिया। जब उसका पति काम पर जाता तो युवक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता।
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यह क्रम लगातार चलता रहा। उसके पश्चात युवक ने उसका उसके पति से तलाक करवा दिया। तलाक के बाद महिला का पति हिसार रहने लगा और युवक उससे शारीरिक संबंध बनाता रहा। जिससे उन दोनों बीच एक पुत्र हुआ। उसके बाद युवक ने उसे घर से निकाल दिया और शादी करने से मना कर दिया।
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महिला ने सहमति से संबंध बनाए

बचाव पक्ष में आरोपी युवक ने अदालत में बताया कि उसने दुराचार नहीं किया बल्कि महिला ने सहमति से संबंध बनाए। पति से तलाक के बाद महिला ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने जमीन बेचकर दस लाख रुपये भी महिला को दिए। लेकिन अब महिला बच्चे के नाम पर जमीन में हिस्सा मांग रही थी।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता महिला के आरोप विरोधाभासी हैं। इस तरह के बयानों से साबित होता है कि महिला व आरोपी लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। महिला ने अपने बयानों में यह भी कहा कि वह आरोपी के साथ कई बार हिसार गई। ऐसे में दो बालिगों ने अपनी सहमति से संबंध बनाए। ऐसे में मामला दुराचार का नहीं बनता। महिला की बिना सहमति से कोई अकेला पुरुष तीन साल तक जबरदस्ती शारीरिक संबंध नहीं बना सकता।
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