सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में साधुओं को ईश्वर से मिलाने के नाम पर नपुंसक बना दिए जाने के मामले की जांच कर रही सीबीआई टीम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से कड़ी फटकार झेलनी पड़ी।
सीबीआई की ओर से मंगलवार को इस मामले की जांच को लेकर सातवीं सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट के जस्टिस आरके जैन की बेंच के समक्ष पेश की गई। इसे बेंच ने रिकॉर्ड पर लेते हुए सीबीआई से पूछा कि इस मामले में जांच पूरी क्यों नहीं की जा रही। जस्टिस जैन ने सीबीआई को साफ कर दिया कि अब और समय नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने सीबीआई को जांच पूरी करने का अंतिम अवसर देते हुए मामले की सुनवाई 30 नवंबर तय कर दी। सीबीआई से कहा गया है कि वह 30 नवंबर को इस मामले की फाइनल जांच रिपोर्ट दाखिल करे।
400 साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप
डेरा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम
- फोटो : Bureau
उल्लेखनीय है कि डेरा सच्चा सौदा के एक साधु हंसराज चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि डेरा सच्चा सौदा में ईश्वर से मिलवाने के नाम पर साधुओं को नपुंसक बनाया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि डेरे ने उसे भी नपुंसक बना दिया है और उसकी तरह डेरे में लगभग 400 साधुओं को नपुंसक बनाया गया है। हंसराज चौहान की इस याचिका पर हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी, जो अब तक जारी है।
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डबल बेंच से नहीं मिली थी राहत
इस मामले की सीबीआई जांच कराने के हाईकोर्ट के एकल बेंच के फैसले के खिलाफ डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील दाखिल कर सीबीआई जांच के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने डेरा मुखी को इस बारे में कोई राहत नहीं दी और सीबीआई को जांच जारी रखने के आदेश दिए।