बाल निकेतन सोसाइटी सेक्टर-15 में रहने वाली कई बच्चियों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। यौन उत्पीड़न के खुलासे के बाद वीरवार को कई परिजन अपनी बच्चियों को लेने बाल निकेतन पहुंचे थे।
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इनमें से कुछ बच्चियां अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहती थीं, लेकिन बाल निकेतन सोसाइटी के दबाव के कारण इन बच्चियों को जाना पड़ा। काफी देर तक वहां ड्रामा चलता रहा। बुधवार को भी कुछ बच्चियां अपने परिजनों के साथ घर चली गई थीं।
अब गिनी चुनी बच्चियां शेष
बाल निकेतन सोसाइटी में अब गिनी चुनी बच्चियां ही रह गई हैं। उधर, जिन बच्चियों के परिजन नहीं आए थे उन्हें प्रशासन के समाज कल्याण विभाग ने स्नेहालय में शिफ्ट करने की कोशिश की, लेकि न कुछ बच्चियों ने स्नेहालय जाने से इंकार कर दिया। बच्चियों के अपने परिजनों के पास चले जाने से इस मामले में पुलिस जांच प्रभावित हो सकती है।
ध्यान रहे कि कमीशन फॉर चाइल्ड राइट के निर्देश पर इन बच्चियों को स्नेहालय भेजने का निर्णय लिया गया था। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो बच्चियां बाद में परिजनों के घर से वापस आ जाएंगी उन्हें स्नेहालय भेज दिया जाएगा।
टेकओवर नहीं कर पाया प्रशासन
बाल निकेतन सोसाइटी में बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न के बाद यूटी प्रशासन के समाज कल्याण विभाग ने स्वयं इसका संचालन करने का निर्णय तो ले लिया, लेकिन कागजी कार्रवाई के चलते प्रशासन अभी इसे टेकओवर नहीं कर पाया है।
ऐसे में अब प्रशासन को इस सोसाइटी को टेकओवर करने में कुछ दिन और लग सकते हैं। वहीं, समाज कल्याण निदेशक राजेश जोगपाल ने शहर के अन्य चाइल्ड व अन्य होम्स का दौरा किया और वहां देखा कि प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं? यह कार्रवाई भी कमीशन फॉर चाइल्ड राइट के निर्देश पर की गई थी। जहां-जहां कमियां थीं उन्हें इसे दूर करने को कहा गया और काउंसिलर नियुक्त करने को कहा गया। मॉनिटरिंग टीम अब नियमित तौर पर इन होम्स का दौरा करेगी।
पुलिस ने केयर टेकर का रिमांड नहीं मांगा
बाल निकेतन सोसायटी में बच्चियों से शारीरिक छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार केयर टेकर मनीष अरोड़ा को पुलिस ने वीरवार को सिविल जज अनिल कौशिक की अदालत में पेश किया।
पुलिस ने मनीष का रिमांड नहीं मांगा और पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत भेजने केलिए अदालत में अर्जी दी। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए मनीष को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सिविल जज अनिल कौशिक ने मामले में पास्को एक्ट लगे होने के कारण आरोपी की अगली सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत में करने के आदेश दिए। अगली सुनवाई 7 मई को होगी। वहीं पुलिस मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
बाल निकेतन सोसाइटी की बच्चियों ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर मार्च में शिकायत की थी। पुलिस के अनुसार, यह हेल्पलाइन नंबर मुंबई में रिसीव होता है। मुंबई की टीम ने इसके बारे में स्थानीय टीम को बताया। उन्होंने समाज कल्याण विभाग को दी, जिसके बाद विभाग ने बच्चियों के बयान दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में बच्चियों ने बताया कि मनीष कुमार उन्हें गले लगाता है और उनके शरीर को अकसर किसी न किसी बहाने से छूता है। वह उनके बेड पर भी आकर बैठ जाता है। इन बच्चियों ने पिछले शनिवार को सेक्टर-9 स्थित पुलिस मुख्यालय के सिंगल विंडो में भी लिखित शिकायत दी थी। लेकिन पुलिस के जांच शुरू करने से पहले ही समाज कल्याण के निदेशक की शिकायत पर पुलिस ने केयर टेकर मनीष अरोड़ा पर आईपीसी की धारा-354, 354ए और पोस्को एक्ट तहत मामला दर्ज किया था