पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए चरखी दादरी सिविल अस्पताल पहुंचाया। मृतक बच्चे का पोस्टमार्टम बोर्ड से कराया जाएगा और इससे पहले उसका कोरोना टेस्ट भी होगा। इस संबंध में थाना प्रभारी राम अवतार ने बताया कि बच्चे के परिजनों ने दंपती पर शक जताया है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता सतबीर का कहना है कि उक्त दंपती उनके परिवार की तरक्की से जलते है और इस कारण उन्हें उन दोनों पर संदेह है।
मृतक का पिता झाड़ली प्लांट में है कार्यरत
मृतक रक्षित का पिता जयभगवान झाड़ली प्लांट में एलडीओ के पद पर तैनात है। जयभगवान और संजो देवी के दो बेटे थे जिनमें रक्षित छोटा था। उनके बड़े बेटे की उम्र करीब छह साल है। मृतक की मां संजो देवी गृहणी है।
अजनबी की गोद में जाते ही रोने लगता था रक्षित
मृतक रक्षित के चाचा और पिता ने बताया कि रक्षित घर में सबसे अधिक दादा-दादी से घुला-मिला था। वह अपने माता-पिता से ज्यादा दादा-दादी के पास रहता था। यहां तक कि अगर उसका चाचा उसे गोद में ले लेता था तो कुछ देर में ही दादा-दादी के पास जाने के लिए रोने लग जाता था। बच्चे के परिजनों ने बताया कि अजनबी के पास तो वह जाता ही नहीं था। ऐसे में रक्षित से प्लॉट से ले जाने वाले कोई जान-पहचान का भी हो सकता है। बच्चे की दादी राजल ने बताया कि उसे रक्षित के रोने की आवाज नहीं आई।
रक्षित का शव प्लॉट से करीब 250 मीटर दूर स्थित एक ग्रामीण के प्लॉट में बने अंडरग्राउंड टैंक से बरामद हुआ है। बौंदकलां थाना प्रभारी राम अवतार ने बताया कि टैंक पर भारी लोहे का ढक्कन लगा हुआ है जो बाहर से खुलता है। 16 माह का बच्चा इस ढक्कन को नहीं उठा सकता, सीधे तौर पर यह हत्या ही नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड के विभिन्न पहलुओं की जांच की जाएगी और पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
चार दिन में बच्चे के मर्डर की दूसरी घटना
बीते चार दिनों में बच्चे की हत्या का दूसरा मामला सामने आया है। इससे पहले गत 17 मई की रात गांव छपार में एक युवक ने अपनी चार वर्षीय भतीजी को जोहड़ में फेंक दिया था। हत्यारोपी मृतका के पिता और अपने बड़े भाई से रंजिश रखता था और बदला लेने के लिए घटना को अंजाम दिया। आरोपी को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब सौंप गांव में बच्चे की हत्या का मामला सामने आ गया है। पिछली वारदात के आरोपी को सदर थाना पुलिस ने बच्ची की गुमशुदगी के 14 घंटे के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया था।
एक्सपर्ट व्यू: ऐसे कृत करने वालों के सामाजिक संबंधों में होता है तनाव
सीबीएलयू प्रोफेसर एवं मनोवैज्ञानिक सतबीर सिंह ने बताया कि बच्चों की हत्या जघन्य कृत है। ऐसे करने वाले लोग कायर होते हैं, क्योंकि वो बच्चों को आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। उनके सामाजिक संबंधों में भी तनाव होता है और कुंठा इस कदर बढ़ जाती है कि वो किसी की मासूम की जान लेने से पहले एक बार भी नहीं सोचते। अगर ऐसा लगातार करें तो वो साइकोपैथी की श्रेणी में आ जाते हैं।