युवती को उसने क्यूआर कोड भेजा, जिसके बाद उसने उक्त रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद कई बहाने कर आरोपियों ने अलग-अलग यूपीआई और बैंक खातों में युवती से कुल एक लाख 75 हजार 473 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। कुछ दिनों बाद राधिका नाम से एक लड़की ने फिर रुपये मांगे, जिसके बाद युवती ने पुलिस को शिकायत दी।
शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया। एसपी साइबर सेल केतन बंसल ने इंस्पेक्टर रणजीत सिंह के नेतृत्व में एक टीम बनाई। पुलिस ने एनसीआर एरिया में छापेमारी के दौरान आरोपी मोहित को गिरफ्तार किया। मोहित ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि वह अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर मंगोलपुरी में फर्जी जॉब कॉल सेंटर चलाता है। इसके बाद पुलिस ने वहां छापेमारी कर तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया।
दो साल से चला रहे थे फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे चारों मिलकर दो साल से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। इस दौरान आरोपियों ने लगभग 50 लाख रुपये ठगे हैं। इस गैंग का मास्टरमाइंड राज कुमार व विनय बताए जा रहे हैं, जो फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाते थे। ये आरोपी सोशल साइट पर जॉब के लिए विज्ञापन भी डालते थे। जब इनसे कोई संपर्क करता तो उसे झांसे में लेकर ठगी कर लेते थे।
सभी को सौंपा हुआ था काम
पुलिस के अनुसार सभी आरोपियों को काम बांटा गया था। जैसे मोहित वाईफाई के जरिए ईमेल भेजता था। विनय फर्जी बैंक खातों का हिसाब रखता था। रिचर्ड दास ठगी हुई रकम एटीएम से निकलवाता था और राज कुमार ठगे हुए रुपयों का हिसाब रखता था। पुलिस के अनुसार आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं। उनसे पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने और किन-किन लोगों को ठगा है।