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चंडीगढ़ रेप: पीड़िता पर एक और कुठाराघात

Wed, 26 Feb 2014 10:22 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दुराचारी कांस्टेबल गैंग मामले की पीड़िता नाबालिग छात्रा और उसके परिवार को नए मकान मालिक ने भी घर छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया है।
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पीड़िता की पहचान उजागर होने के बाद मकान मालिक ने उससे चार मार्च तक घर खाली करने को कहा है। इसके बाद पीड़ित परिवार ने मंगलवार को गवर्नर हाउस पहुंचकर मदद की गुहार की और प्रशासक शिवराज पाटिल से मिलने के लिए समय मांगा।

परिवार ने प्रशासक को लिखे अनुरोध पत्र में पूरी घटना की भी जानकारी दी है। इससे पहले जनवरी में भी इस परिवार को पहचान सार्वजनिक होने पर मकान छोड़ना पड़ा था।
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पुलिस ने बाबा रामदेव को ले जाकर की पहचान उजागर

मामला सामने आने के बाद कुछ पुलिस अधिकारियों पर आरोपियों की मदद के भी आरोप लगे थे। इतना ही नहीं ये अधिकारी उस दौरान बाबा रामदेव और उनके हजारों समर्थकों के साथ पीड़िता के घर गए थे और उसकी पहचान सार्वजनिक कर दी थी।

तब बताया गया था कि बाबा रामदेव पीड़िता की मदद करने आए हैं। मगर कोई मदद नहीं की गई। पहचान सार्वजनिक करने की शिकायत जब पुलिस को दी गई तो उसने भी कोई कार्रवाई नहीं की।

कहीं से मदद नहीं

आरोपियों में पुलिस वालों के सीधे शामिल होने की वजह से पीड़िता की मदद के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है। इसलिए परिवार से बार-बार मकान खाली करवा लिया जा रहा है।

पीड़िता के भाई ने पिछले दिनों सांसद पवन बंसल के घर जाकर मदद की गुहार लगाई थी। पीड़िता के भाई के अनुसार बंसल के पुत्र ने मदद का आश्वासन दिया था। प्रशासन के आला अधिकारियों से भी बात की थी मगर कोई मदद नहीं मिली।

चालान हो चुका है पेश

मामले की जांच कर रही एसआईटी ने पिछले शुक्रवार को चालान पेश किया था। इसमें दो आरोपियों कांस्टेबल अक्षय और सुनील पर दुराचार की धारा और तीन अन्य अनिल, हिम्मत और जगतार पर छेड़छाड़ की धारा लगाई थीं। पांचों बर्खास्त कांस्टेबलों को पास्को एक्ट के तहत आरोपी बनाया गया है। यह मामला पिछले साल 19 दिसंबर को सामने आया था।
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आरोपी अनिल ने दायर की जमानत याचिका

नाबालिग छात्रा से कांस्टेबलों द्वारा गैंगरेप और छेड़छाड़ के मामले में आरोपी एक बर्खास्त कांस्टेबल ने जमानत याचिका दायर कर दी है। अतरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में आरोपी अनिल कुमार की ओर से मंगलवार को यह याचिका दायर की गई।

राजस्थान निवासी अनिल ने याचिका में कुछ दिन पहले ही अपनी शादी होने का भी हवाला दिया है। साथ ही कहा कि उसे केवल शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया। वह तो अन्य आरोपियों और पीड़िता के संबंधों के बारे में भी नहीं जानता।

अनिल के वकील ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ‘जोगिंद्र कुमार बनाम स्टेट ऑफ यूपी’ वर्ष 1994 के केस को जमानत के लिए आधार बनाया है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ पुलिस को 28 फरवरी को अपना जवाब दायर करने को कहा है। इसी दिन सभी आरोपियों की पेशी भी है। तभी आरोपियों को चार्जशीट की कापी दी जाएगी।
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