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पूर्व चीफ इंजीनियर जैरथ समेत 25 कर्मचारी बरी

Thu, 27 Mar 2014 10:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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रिश्वत लेकर कंपनियों को सामान खरीदने का आर्डर देने के मामले में अतिरिक्ति जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की अदालत ने चंडीगढ़ के पूर्व चीफ इंजीनियर केके जैरथ समेत 25 सरकारी कर्मचारियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
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मामले के चार सह आरोपियों की ट्रायल दौरान मौत हो चुकी है। कुल 29 लोगों पर आरोप था। मामले में फंसे कर्मचारी जगदीश मित्तल और एके सचदेवा सरकारी गवाह बन गए थे।

क्या था मामला
विजिलेंस ने 3 फरवरी 1998 को पूर्व चीफ इंजीनियर केके जैरथ समेत 29 लोगों पर भ्रष्टाचार और साजिश रचने का मामला दर्ज किया था।

आरोप था कि पूर्व चीफ इंजीनियर व उनके अधीनस्थ प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों ने निजी कंपनियों से जुड़े कर्मियों दिनेश शर्मा, सुरेश शर्मा व सुनील कालिया के जरिए रिश्वत लेकर इनकी कंपनियों से प्रशासनिक इस्तेमाल के लिए 10 हजार से 1 लाख रुपये तक की कीमत का सामान खरीदा था।
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मामले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जैरथ समेत इन तीन कर्मियों के घरों में रेड करते हुए प्रॉपर्टी दस्तावेज और नगदी कब्जे में ली थी। हालांकि, अपने एक नोट में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जैरथ के बारे में सही रिपोर्ट दी थी।

बचाव पक्ष के वकील तरमिंद्र सिंह के मुताबिक, प्रशासन द्वारा संबंधित सामान की खरीद के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ सप्लाई एंड डिस्पोजल (डीजीएसडी) के रेट के मुताबिक ही पर्चेजिंग कमेटी की सिफारिशों के हिसाब से की गई थी।

वहीं, अदालत में निजी कंपनियों के 18 फर्म अधिकारियों ने बयान देते हुए दिनेश, सुरेश व सुनील को अपनी कंपनियों का प्रतिनिधि मानने से इंकार कर दिया था।

वहीं, अदालत में पेश की गई करीब 300  फाइलों में भी मंगवाए गए सामान की आवश्यकता को बताया गया था। विजिलेंस द्वारा जून, 2005 में एक अन्य एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप एक जैसे ही होने के चलते 11 मार्च, 2008 को अदालत ने दोनों केसों को क्लब कर दिया था।
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इस मामले में 5 अप्रैल, 2013 को 25 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
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