विजय ने अपने दोस्तों राहुल और प्रदीप को साथ मिलाने की बात की। योजना के मुताबिक 11 मार्च की शाम को कुंदन और विजय ने जरी लाल को काम के बहाने बाहर बुलाया था। इसके बाद वह एक साइड दिखाने के लिए जरी लाल को नूरवाला ले गए थे। वारदात के समय कुंदन वहां से निकल गया था। बाकी आरोपी जरी लाल को साथ ले गए और उसकी हत्या कर दी।
खुद लिखवाई गुमशुदगी रिपोर्ट
हत्या का पूरी तरह से पता लगने से पहले तो कुंदन जरी लाल को तलाशने का ड्रामा करता रहा। 13 मार्च को कुंदन अपने साथियों के साथ थाना मॉडल टाउन गया और जरी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। जब कुंदन थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाने के लिए गया था तब थाने के एक एएसआई ने उसे एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था।
कुंदन ने उसे कहा कि एफआईआर की जरूरत नहीं वह सिर्फ कच्ची शिकायत लिख लें। जरी खुद वापस आ जाएगा। उस वक्त एएसआई को कुंदन पर शक हुआ था। गांव बग्गाकलां में जरी लाल का शव मिलते ही पुलिस के शक की सुई पूरी तरह से कुंदन पर गई।
पहले पोस्टमार्टम कराया फिर लिया हिरासत में
पुलिस ने पहले मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम करा शव वारिसों के हवाले किया और अंतिम संस्कार करवाया। अंतिम संस्कार होने के बाद ही पुलिस ने कुंदन को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। सख्ती से पूछने पर उसने पूरी बात बताई। डीसीपी ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।