भिवानी में छात्रा का अपहरण करके गैंगरेप के मामले में आरोपी युवकों के खिलाफ एसआईटी को कोई सुबूत नहीं मिले। इस आधार पर अदालत ने बड़ा कदम उठाया। अदालत ने पांचों आरोपियों को प्राथमिक तौर पर जेल से रिहा करने के आदेश दिए। रात में पांचों को रिहा कर दिया गया। हालांकि, केस अभी अदालत में पेंडिंग है। मामले की अंतिम सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी।
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पांचों आरोपियों में से तीन पर तो छात्रा ने आरोप लगाए थे और दो को जांच के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मामले में जिन पांच युवकों पर छात्रा ने आरोप लगाए थे, उनमें से दो को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है।भिवानी की छात्रा का अपहरण करके गैंगरेप के मामले में सोमवार को जेएमआईसी दीप्ति की अदालत में सुनवाई हुई।
मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अदालत में चालान पेश न करते हुए पांचों आरोपियों को केस से डिस्चार्ज करने की याचिका लगा दी। एसआईटी ने कोर्ट में बताया कि उन्हें पांचों आरोपियों के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला है। इस पर अदालत ने प्राथमिक तौर पर पांचों युवकों को जेल से रिहा करने के आदेश दिये, जिसके बाद रात पौने नौ बजे पांचों आरोपियों को जेल से रिहा कर दिया गया।
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इसी साल 13 जुलाई को मिली थी बेसुध
भिवानी गैंगरेप
बता दें कि इसी साल 13 जुलाई को भिवानी की छात्रा सुखपुरा चौक स्थित पावर हाउस के पास बेसुध अवस्था में मिली थी। होश में आने के बाद छात्रा ने भिवानी निवासी जगमोहन, संदीप, अमित, मौसम और आकाश पर अपहरण करके गैंगरेप का आरोप लगाया था।
मामले में तब मोड़ आया था जब जगमोहन, संदीप और अमित ने अपने लोकेशन की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपते हुए खुद को निर्दोष बताया। मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था।
इसके बाद पुलिस ने इसी मामले में संदीप हुड्डा और प्रमोद नाम के दो युवकों को भी गिरफ्तार किया था। बाद में आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
सुबह कोर्ट में हाजिरी, रात में रिहाई
भिवानी गैंगरेप
आरोपी पक्ष के वकील मनोज कुमार बेडवाल और हरेन्द्र भालौठिया ने बताया कि सोमवार सुबह पांचों आरोपियों ने कोर्ट में हाजिरी लगाई थी। इसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख देते हुए पांचों को जेल भेज दिया था। बाद में एसआईटी इंचार्ज डीएसपी पुष्पा खत्री टीम सहित कोर्ट में पेश हुईं। एसआईटी ने लड़की के बयान पर दर्ज एफआईआर में से पांचों आरोपियों को डिस्चार्ज करने की अर्जी लगाई।
पुलिस ने कोर्ट में बताया कि जांच-पड़ताल के बाद पांचों युवकों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण सहित अन्य आरोपों के सुबूत नहीं मिले हैं। एसआईटी ने कोर्ट में तीनों लड़कों की सीसीटीवी फु टेज भी सौंपी है। लड़की के आरोप गलत हैं। इस कारण पांचों आरोपियों को केस से डिस्चार्ज किया जाए। अदालत ने करीब एक घंटे तक मामले में डीएसपी पुष्पा खत्री से बातचीत की।
इसके बाद कोर्ट ने पांचों आरोपियों को डिस्चार्ज न करके जेल से रिहा करने के आदेश दिये। साथ ही कहा कि अगली सुनवाई में अंतिम फैसला होगा। रात करीब पौने नौ बजे पांचों को जेल से रिहा कर दिया गया।
तीन के खिलाफ सुबूत नहीं, दो पर आरोप नहीं
कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
केस डिस्चार्ज करने की याचिका में एसआईटी ने लिखा है कि लड़की के आरोप के अनुसार मामले में पहले गिरफ्तार जगमोहन, संदीप और अमित के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। वारदात वाले दिन सभी की लोकेशन अलग-अलग जगहों पर मिली है।
मोबाइल लोकेशन भी आरोपियों की ओर से बताई गई जगह पर ही मिली है। लड़कों की डीएनए रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। इसके अलावा बाद में गिरफ्तार संदीप हुड्डा और प्रमोद कुमार पर लड़की ने कोई आरोप नहीं लगाया है। इस कारण इन दोनों को भी आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
फरार आकाश और मौसम पर टिकी फाइनल रिपोर्ट
कोर्ट ने एसआईटी को मामले में अगली सुनवाई पर फाइनल रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये हैं, ताकि एसआईटी की डिस्चार्ज करने की याचिका पर सुनवाई हो सके।
पुलिस की फाइनल रिपोर्ट फरार आरोपी मौसम और आकाश पर टिकी है। पुलिस को अपनी रिपोर्ट में इनके बारे में जांच करके रिपोर्ट पेश करनी होगी। दोनों पर जिला पुलिस ने 10 हजार का इनाम घोषित कर रखा है।
युवकों के जेल से रिहा किये जाने के आदेश पर छात्रा के भाई का कहना है कि पुलिस ने साजिश के तहत आरोपियों को बचाया है। पुलिस आरोपियों से मिल गई है। इस कारण हमने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। अभी मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस पर 15 नवंबर को सुनवाई होगी।
कोर्ट के आदेश के बाद साबित हो गया है कि लड़की ने झूठे केस में सभी को फंसाया था। पुलिस को भी किसी के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला है। इस कारण कोर्ट ने युवकों को जेल से रिहा करने के आदेश दिये हैं। हालांकि अभी तक केस अदालत में पेंडिंग है।
- वकील मनोज कुमार बेडवाल व हरेन्द्र भालौठिया आरोपी पक्ष के वकील