एडीसीपी की वीडियो रिकार्डिंग के मामले में सस्पेंड किए गए एएसआई कुलदीप सिंह जस्सल के खिलाफ एक महिला कांस्टेबल ने अश्लील हरकतें करने का मामला दर्ज करवाया है। महिला कांस्टेबल के मुताबिक, एएसआई उन्हें धमकियां देकर अश्लील हरकतें तो करता ही था, साथ में वाट्सऐप पर अश्लील मैसेज भी भेजता था।
इसके अलावा आरोपी चेकिंग के बहाने महिला कांस्टेबल के हॉस्टल रूम में घुस जाता था। जब अन्य महिला पुलिस मुलाजिम इसका विरोध करती तो आरोपी एएसआई उन्हें भी धमकियां देता था। आरोपी एएसआई कुलदीप सिंह अभी फरार चल रहा है। थाना डिवीजन आठ की पुलिस आरोपी एएसआई की तलाश कर रही है।
महिला कांस्टेबल के अनुसार आरोपी एएसआई कुलदीप सिंह पहले लाइन अफसर था। इस दौरान आरोपी उसके वाट्सऐप नंबर पर अश्लील मैसेज करता था और धमकियां देता था कि वह उसे डिसमिस करवा देगा। उसे डराने के लिए वह डिसमिस लेटर भी दिखाता और उसके साथ अश्लील हरकतें करता। पीड़िता का कहना है कि उसने कई बार शराब के नशे में भी छेड़छाड़ की।
बता दें कि एएसआई कुलदीप सिंह को एडीसीपी रतन सिंह बराड़ ने दफ्तर बुलाया था। एएसआई फोन पर उनकी सारी बातें रिकार्ड करने लगा था। जब उन्हें पता चला तो आरोपी वहां से धक्का देकर भाग गया। उसके बाद मामला डीसीपी ध्रुमण निंबले के ध्यान में लाया गया तो आरोपी का मोबाइल फोन चेक किया गया। इसके बाद उसे सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई थी।
जिस चौकी में था इंचार्ज, उसी में दर्ज हुआ था करप्शन का मामला
पंजाब पुलिस
- फोटो : Demo Pic
जिस चौकी में था इंचार्ज, उसी में दर्ज हुआ था करप्शन का मामला
अक्तूबर 2015 में एएसआई कुलदीप सिंह जस्सल, फोकल प्वाइंट के अधीन चौकी ढंढ़ारी का इंचार्ज था। इस दौरान उसने एक ट्रक ड्राइवर को 2.40 लाख रुपये की नशीली गोलियों के साथ गिरफ्तार किया था। ड्राइवर ने उसे कहा कि वह राजिंदरा मेडिकल स्टोर से ये गोलियां लाया था। इसके बाद एएसआई कुलदीप ने मेडिकल स्टोर के मालिक को मामले में निकालने के लिए लाखों रुपये की रिश्वत ली थी। यह बात उच्चाधिकारियों को पता चल गई थी। 11 अक्तूबर को एसएचओ फोकल प्वाइंट की शिकायत पर आरोपी एएसआई पर करप्शन का मामला दर्ज हुआ था।
महिला कांस्टेबल से छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करने के आरोप में एएसआई कुलदीप सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अभी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस टीमें छापामारी कर रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- सुरिंदर लांबाल, एडीसीपी-3