नेशनल हाईवे के किनारे बने ढाबों और गोदामों से सरेआम पेट्रोल और डीजल की कालाबाजारी की जा रही है। तेल के इस खेल में रिफाइनरी के चालक भी शामिल हैं। अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा हुआ है। स्टिंग ऑपरेशन करते समय छह ऐसे स्थान मिले, जहां से तेल बेचा जाता है। चिंताजनक बात तो यह है कि पास में ही एक गैस गोदाम भी है। यदि कोई अग्निकांड हुआ तो होने वाली तबाही का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर गोदामों और ढाबों की भरमार है। लालड़ू के सरसीणी में कुछ ढाबे ईंधन की कालाबाजारी कर रहे हैं। इसकी शिकायतें लगातार अमर उजाला को मिल रही थीं। हकीकत का पता लगाने के लिए टीम ने अपना एक डमी ग्राहक ढाबों और गोदामों में पेट्रोल खरीदने के लिए भेजा। वहां मौजूद कर्मचारी ने कहा यहां दो, चार लीटर तेल नहीं मिलेगा। कम से कम 100 लीटर की बात करिए। काफी मिन्नतों के बाद कर्मचारी ने बाइक में 200 रुपये का पेट्रोल डाल दिया। वहां छह ढाबों में बने गोदामों में यह खेल चल रहा है।
रिफाइनरी के टैंकर चालकों की मिलीभगत
तेल की इस कालाबाजारी में रिफाइनरी के टैंकर चालक भी शामिल हैं। अंबाला की ओर से आने वाले टैंकर चालक रोज सुबह पहले से तय ठिकाने पर पहुंचते हैं। यहां टैंकर के ऊपरी हिस्से में पाइप डालकर 25 से 30 लीटर तेल निकाल देते हैं। कमाल की बात तो यह है कि जो डीजल-पेट्रोल आप 68 से 75 रुपये प्रति लीटर खरीद रहे हैं, उसे ये धंधेबाज मात्र 35 से 40 रुपये लीटर में खरीदते हैं। इसके बाद प्रति लीटर 20 से 30 रुपये मुनाफा कमाते हैं। सस्ते के चक्कर में लोग भी इनके झांसे में आ जाते हैं। यही वजह है कि इनका धंधा खूब चल रहा है।
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सॉल्वेंट से तैयार कर रहे नकली तेल
तेल की कालाबाजारी करने के साथ-साथ मुनाफाखोर मिलावटी तेल भी बनाकर बेच रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक कारिंदे ने बताया कि पेट्रोल बनाने में सॉल्वेंट, बैंजीन और थिनर का इस्तेमाल होता है। हरियाणा के यमुनानगर, करनाल और पानीपत आदि जगहों से सॉल्वेंट आता है। इसका कलर पेट्रोल जैसा होता है, लेकिन महक अलग-अलग होती है।
कैराना को इसका मुख्य केंद्र माना जाता है। 30 से 40 रुपये प्रति लीटर मिलने वाले सॉल्वेंट को पेट्रोल में बदलकर बेचा जाता है। यूं तो सॉल्वेंट फैक्ट्री में मशीन क्लीनिंग से लेकर ड्राई क्लीनिंग, नेल पॉलिश रिमूवर तक इस्तेमाल होता है। मगर यहां पेट्रोल में मिलावट के लिए इसे जमा किया जाता है।
ऐसे बनता है डीजल
एक ड्रम मिट्टी के तेल से डीजल बनाने के लिए करीब दस से पंद्रह लीटर डीजल को एक बड़े ड्रम में रखकर उसमें सॉल्वेंट, ब्लीचिंग पाउडर व क्रेमोकेनिया पाउडर मिलाया जाता है। कुछ देर में घोल बन जाने के बाद उसे ड्रम में उड़ेल देते हैं। पाइप और मिक्सिंग मशीन से उसे मिट्टी के तेल में अच्छी तरह मिलाया जाता है। इसके लिए जमीन के अंदर टैंक तैयार किया गया है। कालाबाजारी की किसी को भनक न लगे, इसलिए इलाके को टीन लगाकर बंद कर दिया गया है।
सॉल्वेंट भी पेट्रोल जितना ही ज्वलनशील
इस समय पेट्रोल करीब 75 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं अच्छे से अच्छा सॉल्वेंट 60 रुपये, जबकि सामान्य सॉल्वेंट 22 से 50 रुपये प्रति लीटर मिल जाता है। यह पेट्रोल जितना ही ज्वलनशील है, इसलिए आसानी से पेट्रोल में मिलावट हो जाती है और यह मिलावट पकड़ में भी नहीं आती।
खुलेआम डीजल एवं पेट्रोल बेचने और अवैध भंडारण के चलते हादसों का डर भी बना रहता है। लालड़ू में करीब एक से डेढ़ लाख लोग रहते हैं। वहीं हाईवे पर पांच-दस मिनट में सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। यहां आग लगने पर लालड़ू सहित कई गांव तबाह हो सकते हैं, क्योंकि यहां पास में ही गैस का गोदाम और केमिकल फैक्ट्री भी है। कार की सर्विस करने वाले कारीगर से बात की तो उन्होंने बताया कि नकली पेट्रोल-डीजल से एवरेज कम होने के साथ ही गाड़ी का इंजन भी जल्द खराब हो जाता है।
क्या कहते हैं डेराबस्सी के डीएसपी
डेराबस्सी के डीएसपी गुरबक्शीश सिंह ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कालाबाजारी का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। लेकिन जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तेल की कालाबाजारी का मामला संज्ञान में नहीं है। अगर लालड़ू में खुलेआम पेट्रोल और डीजल की कालाबाजारी चल रही है तो जांच के बाद तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी। - कुलदीप बावा, एसडीएम डेराबस्सी